यह आकंड़े दिखाते हैं कि लड़कियां अब अपनी पढाई-लिखाई और आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने को ज्यादा महत्व दे रही हैं। किसी भी समाज में महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं, तो यह आने वाली पीढ़ी के लिए अच्छा माना जाता है। बीते कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में लड़कियों की शादी और कॅरिअर के प्रति समाज की सोच में बदलाव भी देखा गया है। हालांकि, इसमें अभी और सुधार की जरूरत है।
डॉ. हेमा गंडोत्रा, एसोसिएट प्रोफेसर, समाजशास्त्र विभाग, जम्मू विवि
लड़कियों की शादी की उम्र ज्यादा होगी, तो उन्हें अपने अधिकारों की ज्यादा जानकारी होगी और निर्णय लेने की क्षमता भी बढ़ेगी। इससे उनका शोषण कम होगा और घरेलू हिंसा के मामलों में भी गिरावट आएगी। केंद्र सरकार भी लड़कियों की शादी की औसत उम्र 21 साल करने पर विचार कर रही है, जिसे जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए। इससे लड़कियों को और ज्यादा पढ़ने का मौका मिलेगा। डॉ सविता नय्यर, निदेशक, महिला अध्ययन केंद्र, जम्मू विवि
लड़कियों की शादी की औसत उम्र 26 साल है। यह आयु बेबी प्लानिंग के लिए भी आदर्श है। इस उम्र की लड़कियां शारीरिक और मानसिक रूप से बच्चे को जन्म देने के लिए स्वस्थ मानी जाती हैं। नवजात शिशु और मां को भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं कम होती हैं। हालांकि, आजकल की 30 साल की उम्र के बाद बेबी की प्लानिंग शुरू होती है। इससे समस्याएं हो सकती हैं। डॉ. रेनू शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर, स्त्री रोग विभाग, एम्स जम्मू