सियासी दलों के नेताओं ने विधानसभा चुनावों में उम्मीदवारी का दावा पेश करने के लिए अब सोशल मीडिया का सहारा लिया है। अपना नाम चर्चा में लाने के लिए छुटभइये नेताओं तक ने सोशल साइटों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।
यहां तक कि इसके जरिये पार्टी हाईकमान के समक्ष दावेदारी पेश करने लगे हैं।कांग्रेस और भाजपा ने उम्मीदवारों की अभी कोई आधिकारिक सूची जारी नहीं की है।
लेकिन, दिलचस्प यह है कि कुछ नेताओं ने अपना नाम चर्चा में लाने के लिए सोशल मीडिया पर 22 जुलाई को भाजपा के जम्मू संभाग के 37 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी।
मिशन 44 प्लस के लिए उम्मीदवारों की लगी कतार
यही नहीं, पार्टी नेताओं को भी इसका जवाब देते उन्हें पसीना आ रहा है। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिली भारी जीत हासिल हुई थी।
रियासत में विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के मिशन 44 प्लस को लक्ष्य बनाने के बाद टिकट पाने के लिए उम्मीदवार सोशल मीडिया के जरिये अपना नाम उछाल रहे हैं। वाट्सएप के माध्यम से भी यह कवायद चल रही है।
भाजपा के महासचिव बाली भगत का कहना है कि सोशल मीडिया के यहां लाभ भी हैं और नुकसान भी कम नहीं।
इस चुनाव सोशल मीडिया का होगा खूब प्रयोग
वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस बार के चुनाव में सोशल मीडिया का जमकर प्रयोग होगा। खासतौर से वाट्सएप पर खूब प्रचार होगा।
जानकारों की माने तो जिन लोगों को सोशल मीडिया के प्रयोग की जानकारी कम है वह इन दिनों इसका ज्ञान लेने में जुटे हैं।
इस माध्यम को कुछ लोग निजी स्वार्थों के लिए इस्तेमाल कर भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश करते हैं। विस चुनाव के करीब होने से ऐसी स्थिति बनी रहेगी।