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पीओके से आतंकियों की वापसी की नीति रद्द करने पर मंथन

Fri, 05 Aug 2016 10:59 AM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/जम्मू
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आतंकवादी - फोटो : Demo Pic.
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जम्मू कश्मीर में पीओके से आतंकियों की वापसी संबंधी नीति को समाप्त किया जा सकता है। यूपीए शासनकाल में केंद्रीय गृह मंत्रालय की सहमति से बनाई गई इस नीति के तहत पीओके से वापस आए कई पूर्व आतंकी फिर आतंकी गतिविधियों में सक्रिय हो गए हैं।
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लिहाजा, केंद्र अब इस मुद्दे पर कोई जोखिम उठाने के पक्ष में नहीं है। जम्मू कश्मीर सरकार इस नीति को संशोधन के साथ कायम रखने के पक्ष में है। गृह मंत्रालय ने पीओके से लौटकर फिर सक्रिय हुए आतंकियों की सूची के साथ रियासत सरकार से नीति पर मंतव्य मांगा है। 

आतंकी बुरहान वानी की मुठभेड़ में मौत से पहले पीओके से लौटे तीन आतंकियों को फिर से आतंकी वारदात में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पांपोर में सीआरपीएफ काफिले पर हमले में भी पीओके से लौटे कुछ आतंकियों की भूमिका सामने आई थी। अब घाटी में पत्थरबाजी में भी इन पूर्व आतंकियों की भूमिका उजागर हुई है।
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नीत‌ि लागू होने के बाद 100 आतंकी कश्मीर लौटे

terrorist - फोटो : FILE
सुरक्षा बलों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्रालय ने पीओके से लौटे तमाम लोगों के रिकार्ड खंगाले हैं।  अब संदिग्ध भूमिका वाले पूर्व आतंकियों पर कार्रवाई के लिए सुरक्षा बलों को निर्देश दिए गए हैं।
आतंकवाद के चरम दौर में कश्मीर से लगभग चार हजार युवक हथियारों का प्रशिक्षण लेने पीओके चले गए थे। वहां इन्होंने शादियां भी रचा लीं।

इनमें से एक हजार से अधिक लोग अब कश्मीर लौटना चाहते हैं। उनके आवेदन रियासत सरकार और गृह मंत्रालय के जम्मू कश्मीर सेल के पास लंबित हैं। नीति लागू होने के बाद लगभग 100 आतंकी परिवार के साथ कश्मीर लौटे हैं। हालांकि, वापसी के लिए नेपाल रूट को चुना जो नीति में वैध रूट नहीं है।

लिहाजा, उन्हें आत्मसमर्पण किए आतंकियों के लिए घोषित रियायतें नहीं मिलती हैं। अब रियासत सरकार ने उनमें से कुछ आतंकी परिवार के बच्चों को स्कूलों-कालेजों में दाखिले दिलाने के लिए पहल की है। 

नीति के तहत पुंछ जिले के चक्का दा बाग, बारामुला जिले के सलामाबाद, दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अ़ड्डे और पंजाब के बाधा बार्डर को वापसी के लिए वैध रूट घोषित किया गया था। इन रूटों से अब तक एक भी आतंकी वापस नहीं हुआ है। महबूबा मुफ्ती की सरकार ने केंद्र से नेपाल रूट को वैध बनाने की मांग की थी जिसे केंद्र ने खारिज कर दिया है। 
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