जम्मू कश्मीर में पीओके से आतंकियों की वापसी संबंधी नीति को समाप्त किया जा सकता है। यूपीए शासनकाल में केंद्रीय गृह मंत्रालय की सहमति से बनाई गई इस नीति के तहत पीओके से वापस आए कई पूर्व आतंकी फिर आतंकी गतिविधियों में सक्रिय हो गए हैं।
लिहाजा, केंद्र अब इस मुद्दे पर कोई जोखिम उठाने के पक्ष में नहीं है। जम्मू कश्मीर सरकार इस नीति को संशोधन के साथ कायम रखने के पक्ष में है। गृह मंत्रालय ने पीओके से लौटकर फिर सक्रिय हुए आतंकियों की सूची के साथ रियासत सरकार से नीति पर मंतव्य मांगा है।
आतंकी बुरहान वानी की मुठभेड़ में मौत से पहले पीओके से लौटे तीन आतंकियों को फिर से आतंकी वारदात में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पांपोर में सीआरपीएफ काफिले पर हमले में भी पीओके से लौटे कुछ आतंकियों की भूमिका सामने आई थी। अब घाटी में पत्थरबाजी में भी इन पूर्व आतंकियों की भूमिका उजागर हुई है।