मंदिरों के शहर को उड़ता पंजाब बनने से रोकने की कवायद शुरू कर दी गई है। राज्य के आबकारी विभाग ने अधिकारिक तौर पर इसका बीड़ा उठा लिया है। पहले विभाग यह देखेगा कि जम्मू में नशे की जड़ें कैसे, कौन और कहां फैला रहा है। इसके बाद इस पर रोक कैसे लगे, इसके लिए काम किया जाएगा। फिलहाल जम्मू विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की इसके लिए मदद ली जाएगी।
आबकारी विभाग के आयुक्त अंगचुक छेरिंग का कहना है कि जम्मू विश्वविद्यालय में रिसर्च करने वाले स्टूडेंट्स से इस पर शोध कराया जाएगा। इसके लिए फंडिंग विभाग करेगा। किस तरह का नशा बिक रहा है, नशा बिकने का साधन क्या है, किस आयु के लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं, इसका कितना असर पड़ रहा है, यह नशा शारीरिक और वित्तीय स्तर पर कितना नुकसान कर रहा है, यह नशा कहां से और कैसे आता है।
यह सब तमाम बातें शोध में शामिल होंगी। आयुक्त का कहना है कि इसके लिए विवि प्रशासन से बात की जा रही है। जल्द ही हम इसका शोध कराएंगे। परिणाम सामने आने पर इस पर अंकुश लगाने के लिए एक रणनीति के तहत काम करेंगे।
स्कूल, कालेजों में वर्कशाप
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- फोटो : demo Pic.
नशे के विरोध में जागरूकता लाने के लिए विभाग स्कूल, कालेज और जम्मू विश्वविद्यालय का सहयोग लेगा। एक वर्कशाप आयोजित की जाएगी। इसमें सबको शामिल किया जाएगा, ताकि स्टूडेंट्स के माध्यम से इसके प्रति जागरूकता लाई जा सके।
जम्मू में चिट्टे का क्रेज
मंदिरों के शहर में युवा वर्ग चिट्टे के मकड़जाल में फंसता जा रहा है। 3 से 4 हजार रुपये में एक-एक नशे की डोज बेची जा रही है। सोशल नेटवर्किंग साइट के माध्यम से स्कूल, कालेजों, घरों तक युवाओं को इसकी सप्लाई पहुंचाई जा रही है। पिछले दो साल में अधिकारिक तौर पर आधा दर्जन युवाओं की मौत नशे की वजह से हुई है, जबकि हर साल 400 से 500 युवा नशे की लत में जकड़ कर अस्पताल पहुंच रहे हैं।
पंजाब और पीओके से आ रही खेप
जम्मू में नशे की खेप अधिकतर पंजाब और पीओके से आ रही है। पंजाब में जहां बार्डर से तस्करी हो रही है, वहीं रियासत में एलओसी से इसके तार जुड़े हुए हैं। बड़े पैमाने पर इन क्षेत्रों से हेरोइन (चिट्टा), ब्राउन शूगर और चरस आ रही है।