जम्मू कश्मीर के महालेखाकार (आडिट) ने विभिन्न सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों में 795 करोड़ की गड़बड़ियां पाईं हैं। महालेखाकार की ओर से रियासत सरकार से आगे की कार्रवाई करने की सिफारिश की गई है।
कश्मीरी विस्थापितों की वापसी और पुनर्वास के प्रधानमंत्री पैकेज के अंतर्गत बिना प्रशासनिक मंजूरी, टेंडर प्रक्रिया, ठेकेदारों को अलाटमेंट पत्र न जारी करने के बावजूद 36.37 करोड़ रुपये चार स्थानों पर प्री फेब्रिकेटिड हट बनाने पर खर्च कर दिए गए।
पुलिस के पास निर्माण कार्यों के लिए 394.30 करोड़ की राशि होने के बावजूद 18.10 करोड़ रुपये की राशि ही मरम्मत कार्यों व पुलिस थानों के नवीनीकरण पर खर्च हुई। मनरेगा की 40.24 लाख की राशि जिन बैंक खातों में डाली बर्ताई गई वह थे ही नहीं।
महालेखाकार खालिद बिन जमाल ने शनिवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि 31 मार्च 2014 की कैग रिपोर्ट विधानसभा में सरकार की ओर से पेश कर दी गई है।
महिला थानों में शौचालय तक नहीं बने
इस रिपोर्ट के माध्यम से सरकार के ध्यान में गड़बड़ियों को लाया गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में 103 पुलिस चौकियां और 18 पुलिस थानों के पास अपनी इमारतें नहीं है।
इसके बावजूद पुलिस विभाग के पास 394.30 करोड़ रुपये निर्माण कार्य के लिए होने के बावजूद 18.10 करोड़ की राशि ही खर्च की गई। जबकि 12 फीसदी थानों में महिलाओं के लिए शौचालय तक नहीं हैं।
16 पुलिस थानों में हिरासत में रहे लोगों को डाइट शुल्क तक मुहैया नहीं करवाया गया। जम्मू कश्मीर एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी ने बिना बिजली के गांवों में बिजली मुहैया करवाने के लिए सोलर लाइटिंग सिस्टम गांवों में लगा दिए।
इस पर 13.45 करोड़ रुपये की राशि खर्च हुई। 2.52 करोड़ रुपये के सोलर उपकरण लगाने के तत्काल बाद खराब हो गए।
बिना खाते के ट्रांसफर कर दिए पैसे
खाता धारकों के बैंक खाते न होने के बावजूद मनरेगा की 40.24 लाख की राशि ऐसे खातों में डालकर राशि जारी कर दी गई जोकि बैंकों में थे ही नहीं।
उन्होंने कहा कि कश्मीरी विस्थापितों की घाटी वापसी और पुनर्वास के लिए प्रधानमंत्री पैकेज के अंतर्गत जम्मू कश्मीर स्माल स्केल इंडस्ट्री डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड ने बिना प्रशासनिक मंजूरी और टेंडर आमंत्रित करने एवं जरूरी औपचारिकताओं को पूरा किए बिना दो ठेकेदारों को चार स्थलों पर प्री फेब्रिकेटिड हट बनाने का काम देकर 36.37 करोड़ की राशि खर्च कर दी।
जम्मू कश्मीर अनुसूचित जाति जन जाति और ओबीसी विकास प्राधिकरण ने लाभार्थियों की पहचान का सर्वे किए बिना ही 42.45 करोड़ की राशि जारी कर दी।
वन भूमि पर अतिक्रमण में 88 फीसदी की बढ़ोतरी
महालेखाकार खालिद बिन जमाल ने कहा कि मार्च 2003 से मार्च 2012 की अवधि के दौरान वन भूमि पर अतिक्रमण में 88 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। मार्च 2003 में 9214.53 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण था जोकि 2012 में बढ़कर 17352 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। वन सुरक्षा बल के पास हथियारों से लेकर संचार उपकरण तक की भारी कमी है। रियासत में 23 यूनिटों के फील्ड स्टाफ में से 19 यूनिटों के कर्मी हथियारों को चलाना तक नहीं जानते।
5.85 करोड़ खर्च कर मात्र एक प्लेसमेंट करवाई
जेएंडके स्टेट ओवरसीज इंप्लायमेंट कारपोरेशन को 2009 में गठित कर पांच सालों में 7000 शिक्षित, कुशल युवाओं को रोजगार देने का काम सौंपा गया।
मगर 5.85 करोड़ की राशि खर्च कर कारपोरेशन मात्र एक प्लेसमेंट ही करवा पाया। 64.57 लाख की राशि इस दौरान कारपोरेशन के मुलाजिमों के वेतन व प्रशासनिक खर्च में चली गई।
रिटायर पुलिस अधिकारियों के साथ 198 पुलिस कर्मी अटैच
जेएंडके पुलिस मैन्युल में केवल सेवारत पुलिस अधिकारियों को निजी अर्दली के तौर पर हैड कांस्टेबल व कांस्टेबलों को रखने का अधिकार है। बहरहाल रियासत में 198 पुलिस कर्मी रिटायर पुलिस अधिकारियों के साथ अटैच हैं।
180 पुलिस अधिकारियों को नियमों की अनदेखी कर पुलिस अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा में तैनात किया गया है। 64 पुलिस स्टेशनों में बुलेट प्रूफ वेस्ट तक नहीं है। ऐसे थानों में 2865 पुलिस कर्मी तैनात हैं।