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Jammu News: उपचुनाव में मत प्रतिशत बढ़ाने के लिए कश्मीरी पंडितों को साधेगा चुनाव आयोग

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- जम्मू-कश्मीर से पलायन कर चुके कश्मीरी पंडितों को प्रेरित करने के लिए पांच राज्यों में लगाए जाएंगे शिविर
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- बडगाम और नगरोटा की सीट पर होने हैं उपचुनाव
राकेश शर्मा
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में होने वाले उपचुनाव में मत प्रतिशत बढ़ाने के लिए चुनाव आयोग कश्मीरी पंडितों को साधेगा। प्रदेश से 90 के दशक में पलायन कर चुके कश्मीरी पंडितों को मतदान में हिस्सेदार बनाने की कवायद छेड़ी गई है। इसके लिए आयोग ने देश के पांच राज्यों में डेरा डालने का फैसला किया है। आगामी 19 से 23 अप्रैल के बीच जम्मू-कश्मीर के अधिकारी इन राज्यों में जाकर कश्मीरी पंडितों को मतदान के लिए जागरूक करेंगे।

केंद्र शासित प्रदेश में दो विधानसभा क्षेत्र रिक्त हैं। इनमें बडगाम सीट मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से छोड़ने की वजह से खाली हुई है। दूसरी सीट नगरोटा में भाजपा विधायक देवेंद्र राणा के निधन के बाद खाली है। इन दोनों सीटों पर अभी चुनाव की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन चुनाव आयोग घोषणा से पहले की तैयारियों में जुट गया है। चुनाव आयोग ने दोनों विधानसभा क्षेत्रों में मतदान केंद्रों की संख्या को पहले की बढ़ा दिया है। बडगाम में 173 मतदान केंद्र होंगे, जबकि नगरोटा में 150 मतदान केंद्रों पर वोट डालने का अवसर मिल पाएगा। चुनाव आयोग ने मतदाताओं को 24 अप्रैल तक पंजीकरण का अवसर दिया है। बडगाम विधानसभा उपचुनाव के लिए चुनाव आयोग ने जो शेड्यूल जारी किया है। इसके तहत 13 अप्रैल को बंगलुरू, 16 अप्रैल से 23 अप्रैल तक दिल्ली, 19 और 20, 21 को मुंबई, 23 अप्रैल से पुणे, 21 अप्रैल से कश्मीरी भवन चंडीगढ़ में मतदान में भूमिका बढ़ाने के लिए विशेष कार्यक्रम होंगे। चुनाव आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों को पत्र जारी कर दिए हैं।
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बडगाम सीट पर उमर अब्दुल्ला ने 18 हजार 485 मतों से पीडीपी के सैय्यद मुंतजिर मेहदी को हराया था। नगरोटा में भाजपा के देवेंद्र सिंह राणा ने 48 हजार 113 वोट हासिल किए थे। नेशनल कॉन्फ्रेंस के जोगिंद्र सिंह 17 हजार 641 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे। नवंबर, 2024 में देवेंद्र सिंह राणा का निधन हो गया था। जबकि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने दो सीटों पर चुनाव जीतने के बाद बडगाम की सीट छोड़ दी। अब चुनाव आयोग को छह माह के भीतर इन दोनों सीटों पर उपचुनाव करवाने हैं और मई माह में छह महीने पूरे हो रहे हैं। इसे देखते हुए चुनाव आयोग ने अब तैयारी तेज कर दी है। इसी कड़ी में देश भर में बसे जम्मू-कश्मीर के लोगों को एकजुट करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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