भारत के खिलाफ लगातार जहर उगलने वाले हुर्रियत (जी) के अध्यक्ष कट्टरपंथी अलगाववादी सैयद अली शाह गिलानी को आखिर उस समय खुद को भारतीय बताना ही पड़ा जब विदेश जाने के लिए पासपोर्ट की औपचारिकताएं पूरी की गईं। पासपोर्ट के लिए राष्ट्रीयता वाले कालम में गिलानी ने स्वयं को भारतीय बताया है।
शुक्रवार को नजरबंदी से आजादी मिलने के बाद पासपोर्ट दफ्तर पहुंचकर गिलानी ने बकाया औपचारिकताएं पूरी कीं। बायो मीट्रिक्स डाटा तथा फिंगर प्रिंट दिए। पासपोर्ट मुद्दे पर देशभर में काफी हंगामा और विरोध प्रदर्शन हुए थे। पासपोर्ट अधिकारी के सामने पेश होने के दौरान औपचारिकताएं पूरी करते समय तो गिलानी ने खुद को भारतीय घोषित किया, लेकिन, ऑफिस से बाहर निकलते ही वे अपने असली रंग में आ गए और मीडिया से बोले कि मैं जन्म से भारतीय नहीं हूं।
पासपोर्ट पर खुद को भारतीय लिखना हर कश्मीरी की मजबूरी है और मैंने भी मजबूरी के चलते ऐसा किया। गिलानी के पासपोर्ट मसले को लेकर भाजपा और पीडीपी में शुरू से ही तनातनी रही है। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने इंसानियत के नाते बेटी से मिलने जाने देने के लिए गिलानी को पासपोर्ट दिए जाने की वकालत की थी। भाजपा ने इसका शुरू से ही विरोध किया था। भाजपा का कहना था कि नागरिकता भारतीय लिखने पर ही पासपोर्ट दिया जाना चाहिए।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया था कि गिलानी को पासपोर्ट देने में मंत्रालय को आपत्ति नहीं है, बशर्ते वे सारी औपचारिकताएं पूरी करें। गिलानी समर्थकों के साथ बुलेवार्ड रोड पर स्थित पासपोर्ट ऑफिस पहुंचे थे। गौरतलब है कि गिलानी ने मई 2015 में पासपोर्ट के लिए आनलाइन अज़ीर् दी थी। वह बीमार बेटी से मिलने परिवार सहित सऊदी अरब जाना चाहते हैं।
भाजपा ने फिर किया विरोध
भाजपा ने एक बार फिर गिलानी को पासपोर्ट दिए जाने की मुखालफत की है। विधायक रवींद्र रैना का कहना है कि वह पाकिस्तानी एजेंट हैं जो हमेशा हिंदुस्तान के खिलाफ जहर उगलते हैं। पिछले 25 सालों में उनके द्वारा घाटी में खूनखराबा कराया गया। ऐसे में उन्हें पासपोर्ट कतई नहीं मिलना चाहिए बल्कि जेल में डाल देना चाहिए।