सप्ताह भर पहले सैन्य कैंप पर हुए आतंकी हमले के दाग को उड़ी वासियों ने मंगलवार को बंपर वोटिंग कर धोने की कोशिश की। सरहद पार यह संदेश देने में सफल रहे कि अलगाववाद की लाख कोशिशें जम्हूरियत के जोश पर भारी नहीं पड़ सकती।
त्राल में भी बंदूक से डरने की बजाय लोग घरों से बाहर निकले। रियासत में 1967 से लेकर 2008 तक हुए सात चुनावों में उड़ी में 65 प्रतिशत से अधिक लोगों ने मताधिकार का प्रयोग किया। पिछले चुनाव में तो यहां सर्वाधिक 82 प्रतिशत मतदान हुआ था।
लोकतंत्र के प्रति उड़ीवासियों के समर्थन को देखकर ही शायद चुनाव से ठीक पहले लोगों के दिलोदिमाग में दहशत फैलाने के नापाक इरादे से हमले किए गए थे। बंपर वोटिंग कर यहां के लोकतंत्र परस्त लोगों ने अलगाववादियों के हौसले पस्त कर दिए। कुछ दिनों पहले उड़ी, त्राल सहित चार स्थानों पर आतंकियों ने हमले कर दहशत पैदा करने की कोशिश की थी।