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बजट में होगा विशेष रोजगार पैकेज का ऐलान

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वित्त मंत्री डॉ. हसीब द्राबू के समक्ष अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने की चुनौती है। आर्थिक संतुलन चरमरा चुका है और रियासत गंभीर वित्तीय संकट से रूबरू है। ऐसे में वित्तीय वर्ष 2015-16 के लिए जम्मू कश्मीर के बजट से आमदनी और खर्च के बीच की गहरी खाई पाटकर नए निवेश का माहौल बनाना जरूरी है।
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नए बजट में हर स्तर पर निवेश को बढ़ावा देने के कारगर प्रयास दिखेंगे। जम्मू कश्मीर के बजट को सहकारी संघवाद से जोड़ने के क्रम में द्राबू बजट के मौलिक ढांचे में बदलाव लाने के मूड में हैं। बजट में सरकार के शत प्रतिशत सहयोग से नए रोजगार पैकेज को लागू करने का ऐलान संभव है।

इस पैकेज का सारा खर्च सरकार उठाएगी। बजट में विकास का रोडमैप दिखेगा। डॉ. द्राबू का कहना है कि कृषि में दो स्तरीय रणनीति पर अमल की जरूरत है। एक जीविका से संबंधित कृषि है और दूसरी व्यवसायिक खेती है।
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टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाएगा

जीविका से जुड़ी कृषि में सार्वजनिक निवेश और व्यवसायिक कृषि में निजी निवेश के लिए माहौल बनाना है। व्यवसायिक कृषि में सेब से लेकर तमाम हार्टिक्लचर को शामिल किया जा सकता है। पर्यटन का विकास रियासत की अर्थव्यवस्था को गति देगा। गौरतलब है कि गठबंधन के एजेंडे में पर्यटन विकास को प्राथमिकता दी गई है।

बजट में जम्मू के लिए तोहफे के रूप में स्वायत्त टूरिज्म सर्किट विकसित करने का ऐलान भी संभव है। जम्मू में जाम से निजात के लिए रिंग रोड, झेलम और तवी नदियों की सफाई के लिए राशि का प्रावधान भी हो सकता है। ऊर्जा क्षेत्र के लिए अलग से बजट लाया जा सकता है।

वैसे भाजपा और पीडीपी की गठबंधन सरकार फिलहाल सिर मुंडाते ही ओले झेल रही है। खजाना खाली है और बीमार अर्थव्यवस्था बड़ा निवेश चाहती है। वित्त मंत्री द्राबू ने रियासत के बजट को देश के विकास से जोड़ने की बात कही है। विधानसभा में 22 मार्च को बजट पेश करते वक्त नए वित्त मंत्री की बाजीगरी की भी अग्निपरीक्षा होगी।

बिजली खरीद पर चार हजार करोड़

रियासत को हर साल बिजली संकट से गुजरना पड़ता है और दूसरे राज्यों से बिजली खरीदने की मजबूरी होती है। आर्थिक रूप से कमजोर इस रियासत को हर साल लगभग चार हजार करोड़ रुपये बिजली खरीद पर खर्च करने पड़ते हैं। पिछले साल रियासत सरकार ने बिजली खरीद के लिए 3336 करोड़ का बजट प्रावधान किया था।

बजट में बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत महसूस की जा रही है। मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद ने एनएचपीसी के प्रोजेक्ट रियासत सरकार को वापस करने की मुहिम चलाई है। केंद्र सरकार इस पर फिलहाल सैंद्धांतिक रूप से सहमत भी है। इन प्रोजेक्टों की वापसी होती है तो बिजली संकट का कुछ हद तक समाधान हो सकता है लेकिन बिजली खरीदने की विवशता तब भी होगी।

राज्यपाल से मिलकर किया विमर्श
वित्त मंत्री ने शनिवार को राज्यपाल एन एन वोहरा से मुलाकात कर वित्तीय स्थिति पर चर्चा की। विकास प्रक्रिया को गति देने के प्रयासों पर भी बातचीत हुई। राज्यपाल शासन के दौरान वोहरा ने वित्तीय संकट के समाधान के लिए कई प्रयास किए थे। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात कर लंबित राशि में से 1100 करोड़ का भुगतान भी कराया।
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वेतन-पेंशन मद पर 18 हजार करोड़

रियासत को पेंशन मद में इस साल 3980 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ा है। रियासत में लगभग एक लाख 70 हजार पेंशनधारी कर्मी हैं। सरकार ने नई पेंशन योजना शुरू की थी जो लाभार्थी के अंशदान पर निर्भर है।

इस योजना में अबतक लगभग 42 हजार पेंशनधारियों का लाया जा सका है। इसी तरह वेतन भुगतान पर लगभग 18 हजार करोड़ रुपये खर्च होते हैं।

मोदी ने दी है राहत
नई सरकार लोकप्रिय बजट पेश करने के क्रम में कुछ वस्तुओं पर वैट घटा सकती है। इसका आर्थिक बोझ भी अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ने वाला है।

नए वित्त मंत्री द्राबू के लिए राहत की बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14वें वित्त आयोग की सिफारिशें मंजूर कर केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी 32 से बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर दी है।

इस 10 प्रतिशत के इजाफे से रियासत को लगभग एक हजार करोड़ का फायदा हो सकता है।
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