बासमती उत्पादन वाली कृषि भूमि पर कालोनी व पक्की इमारतें बनाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के जस्टिस हसनैन मसूदी और जस्टिस ताशी राबस्तन की खंडपीठ ने बिल्डिंग आपरेशन कंट्रोलिंग अथारिटी (बोका) को आदेश दिए कि ऐसे निर्माण की अनुमति नहीं दी जाए।
जेएनएफ द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार एडवोकेट रंजीत सिंह चिब ने बासमती के खेतों में हो रहे पक्के निर्माणों के खिलाफ जनहित याचिका दायर करते हुए कहा कि पिछले पांच सालों में हजारों कनाल जमीन पर रिहायशी कालोनियां, कारोबारी कांप्लेक्स और बैंक्वेट हाल का निर्माण हो चुका है।
जेएंडके लैंड रेवेन्यू एक्ट के अनुसार इसके लिए राजस्व मंत्री से अनुमति भी नहीं ली गई। मामले की सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने बोका को आदेश दिए। कोर्ट के अनुसार जम्मू-कश्मीर कंट्रोल आफ बिल्डिंग आपरेशन एक्ट 1988 के तहत आरएस पुरा क्षेत्र में इस तरह के निर्माण की अनुमति तब तक नहीं दी जाए, जब तक रेवेन्यू रिकार्ड में उक्त जमीन गैर कृषि भूमि दर्ज न हो जाए।
खंडपीठ ने प्रतिवादी को कमेटी का गठन करने के निर्देश दिए, जो असिस्टेंट कमिश्नर पद के अधिकारी के नेतृत्व में बने। कमेटी आरएस पुरा क्षेत्र का सर्वे करे और रिपोर्ट में बताए कि क्षेत्र में कितनी कृषि जमीन को गैर कृषि भूमि में परिवर्तित कर दिया गया है।
कमेटी अपनी रिपोर्ट मामले की अगली सुनवाई से पहले अदालत में पेश करे। साथ ही पंजीकरण अथारिटी को निर्देश दिए कि किसी भी कागजात के स्थानांतरण या बनाने के दौरान जेएंडके एलिनेशन आफ द लैंड एक्ट का पालन किया जाए।