जम्मू। वन अधिकार अधिनियम के तहत जम्मू-कश्मीर में 6,058 दावों का निपटारा किया गया हैं। इनमें 348 व्यक्तिगत और 5,710 सामुदायिक वन अधिकार दावे शामिल हैं। यह जानकारी वनमंत्री जावेद अहमद राणा ने विधानसभा पर वन विभाग का अनुदान परित करते हुए कही।
वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण के बारे में बात करते हुए जावेद राणा ने कहा कि एक पेड़ मां के नाम कार्यक्रम के तहत वर्ष 2024-25 के दौरान 1.50 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य हासिल किया जाएगा। भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट 2023 के अनुसार जम्मू-कश्मीर में वन और वृक्ष आवरण में 91.25 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है। चालू वित्त वर्ष के दौरान 16.251 लाख घनफुट लकड़ी निकाली गई। मंत्री ने कहा कि विभाग स्टेट एक्शन प्लान ऑन क्लाइमेट चैलेंज (एसएपीसीसी) को अपडेट कर रहा है। योजना में 2030 तक विभिन्न विभागों द्वारा लागू किए जाने वाले 55 शमन और 98 अनुकूलन उपायों की रूपरेखा है। विकास गतिविधियों के लिए वन भूमि देने के लिए परिवेश पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन 2,775 फारेस्ट एनओसी मिली हैं, जिनमें से पहले चरण में 1,159 अनुमोदन और 507 अंतिम अनुमोदन दिए गए हैं, जिससे 629.95 हेक्टेयर भूमि का डायवर्जन हुआ है। मंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण समिति (जेकेपीसीसी) ने उद्योगों के लिए सहमति वैधता अवधि बढ़ाकर और संशोधित उद्योग वर्गीकरण किया है। ऑपरेट करने की सहमति की वैधता ऑरेंज श्रेणी के उद्योगों के लिए आठ से 10 साल और ग्रीन श्रेणी के उद्योगों के लिए 12 से 15 साल तक बढ़ा दी गई है जो स्थापना की सहमति अब पांच साल के लिए वैध है, जिसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है। वन्यजीव संरक्षण विभाग ने अवैध शिकार और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए 42 नियंत्रण कक्ष स्थापित किए हैं। बुनियादी ढांचे में सुधार और प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाने के लिए कश्मीर वन प्रशिक्षण स्कूल का उन्नयन किया जा रहा है
डीए-जेजीयूए 20 जिलों के 393 गांवों को कवर किया जाएगा
जनजातीय कार्य विभाग के बारे में जावेद राणा ने कहा कि विभाग को शोध अध्ययन करने और जनजातीय मामलों से संबंधित दस्तावेज तैयार करने का काम सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए धरती आभा जनजातीय ग्रामीण उत्कर्ष योजना (डीए-जेजीयूए) के लिए 30.44 करोड़ रुपये अस्थायी बजट प्रावधान है। इस योजना में 17 विभागों के 25 हस्तक्षेप शामिल हैं। शुरुआत में 20 जिलों के 393 गांवों को कवर किया जाएगा। इनमें कम से कम 50 प्रतिशत एसटी आबादी या 500 एसटी व्यक्ति हैं। मंत्री ने कहा कि खिमबेर श्रीनगर में 11.50 करोड़ रुपये की लागत से जम्मू-कश्मीर जनजातीय अनुसंधान परिसर स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य अनुसंधान, सांस्कृतिक संरक्षण, क्षमता निर्माण और जागरूकता कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करना है। विभाग 28 छात्रावास हैं, जिनमें 2,885 छात्र रहते हैं। पांच नए छात्रावास बनकर तैयार हैं। 89.21 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 25 और छात्रावास निर्माणाधीन हैं, जिनमें से पांच 2025-26 के दौरान पूरे हो जाएंगे। थानामंडी (राजोरी), दलवास (रामबन) और दुबजान (शोपियां) में जनजातीय आबादी के लिए तीन पारगमन आवास 2025-26 के दौरान से पूरे हो जाएंगे। मंत्री ने बताया कि 2025-26 तक 10 दुग्ध गांवों का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।इसके लिए 800 लाख रुपये का आवंटन किया गया है, जिससे 410 अनुसूचित जनजाति के लाभार्थी लाभान्वित होंगे।
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किस विभाग को कितना अनुदान मिला
जम्मू और कश्मीर विधानसभा ने आज वन पारिस्थितिकी और पर्यावरण के लिए 1545.32 करोड़ रुपये, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग के लिए 1576.71 करोड़ रुपये, पीएचई (जल शक्ति) के लिए 3501.27 करोड़ रुपये और जनजातीय मामलों के विभाग के लिए 442.99 करोड़ रुपये की अनुदान मांगों को पारित किया।