फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jammu News: शाम लाल बोले - रियासत मंत्री की खरीद नहीं, राणा ने कहा - जुबान संभाल के बात करें

विज्ञापन
विधानसभा सत्र में बहस करते विधायक।
विज्ञापन
वन अधिकार अधिनियम पर तीखी बहस और कहासुनी
विज्ञापन

जम्मू। वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) को लेकर सदन में वन मंत्री जावेद अहमद राणा और भाजपा विधायक शाम लाल शर्मा के बीच तीखी बहस और कहासुनी हुई। नौबत जुबान संभाल कर बात करने और शट योर माउथ जैसे शब्दों तक पहुंच गई। स्पीकर के हस्तक्षेप के बाद बहस समाप्त हुई।
शनिवार को वन विभाग में बजट अनुदान पर जवाब देते हुए मंत्री जावेद ने कहा कि एफआरए का जम्मू-कश्मीर में सही से कार्यान्वयन नहीं हुआ है। 2019 के बाद राजनीतिक प्रणाली न होने से इसका कार्यान्वयन नहीं हुआ। प्रदेश में लोगों की छत्त आसमान और जमीन बिछौना है, जो जहां बैठे हैं, उन्हें वहां से कोई नहीं हटाएगा। मंत्री की इस बात पर विधायक शाम लाल शर्मा ने कहा कि वन मंत्री ने एफआरए से आगे जाकर बात कही है। जम्मू-कश्मीर और शेष भारत के बीच कानून के शासन की भावना अलग-अलग होनी चाहिए। एफआरए 2019 में यह जम्मू-कश्मीर में लागू हुआ है। हकदार वो है, जिसके पास एक मरला भूमि भी नहीं है, और कोई पानी के स्रोत पर बसा है तो मंत्री को किस ने अधिकार दिया है कि वे उन्हें वहां रहने दें। जम्मू-कश्मीर मंत्री की खरीद नहीं है। इस पर जावेद अहम राणा तिलमिला उठे और शाम लाल शर्मा को जवाब देते हुए कहा, जबान संभाल कर बात करें, मैं जानता हूं तुम कौन हो।
विज्ञापन


भाजपा मगरमच्छ के आंसू बहा रही
मंत्री जावेद राणा ने कहा- मेरे पास से जो गुजरा, मेरा हाल तक ना पूछा मैं कैसे मान जाऊं कि वो दूर जाके रोए। इसके बाद भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा भाजपा मगरमच्छ के आंसू बहा रही है, जिसे उसे बंद करना चाहिए। भाजपा कहा करती थी कि जहां से अनुसूचित जाति समुदाय के व्यक्ति की बकरी गुजरेगी वो जमीन उसकी होगी। अब मगरमच्छ के आंसू बहाने बंद करे।कानून हमें आता है हमें न सीखाएं। भाजपा खुद को अनुसूचित जनजाति के मसीहा बताती है, लेकिन यहां विरोध करते है।
विज्ञापन

-
सदन से बाहर निकले तो भी दोनों मंत्रियों का फूटा गुबार
विधानसभा के बाहर मीडिया से बात करते हुए मंत्री जावेद राणा ने कहा कि भाजपा हमेशा अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के खिलाफ रही है। भाजपा नहीं चाहती है कि इन समुदाय आर्थिक व सामाजिक रूप से सशक्त हो। लोगों की चुनी हुई सरकारी बनी और सरकार वन अधिकार अधिनियम लागू करेगी। ऐसे में भाजपा डरी है,इसके लिए इस तरह की विरोध जता रही है। वहीं शाम लाल शर्मा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि विधानसभा की कार्यवाही तय नियम के तहत होती है। मंत्री अपने अनुदान पर जवाब दे रहे थे उन्होंने तैश में आकर ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जो जहां बसा उसे वहां से कोई नहीं हटा सकता है। में मंत्री की बताना चाहता था कि ऐसे नहीं एफआरए में तय है की हकदार कौन है। नेकां ने इन समुदाय के साथ हमेशा भेदभाव किया है।उन्होंने कहा कि वर्तमान में विधानसभा किसी नियम के तहत नहीं चल रहा है। नेकां के इशारों पर कार्यवाही चल रही है
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें