बजट सत्र : नेकां विधायक हसनैन ने कहा-सिंचाई के लिए खोदे 132 बोरवेल काम में नहीं आए, अन्य सदस्य बोले-जवाबदेही तय हो
जम्मू। प्रदेश में केसर की खेती को बढ़ावा देने के लिए शुरू किए गए 400.11 करोड़ के पीएम केसर मिशन की जांच होगी। कृषि उत्पादन मंत्री जावेद अहमद डार ने बजट सत्र के दौरान नेकां विधायक एवं पूर्व न्यायाधीश हसनैन मसूदी के पूछे गए सवाल पर यह बात कही।
विधायक मसूदी ने कहा था कि जिस लक्ष्य के लिए मिशन को शुरू किया गया था, उस पर काम नहीं हुआ। इसके लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने छिड़काव विधि से सिंचाई के लिए खोदे गए 132 बोरवेल के काम नहीं आने को लेकर भी सवाल उठाया था। पूरक प्रश्न में सीपीआई (एम) के एमवाई तारीगामी ने कहा कि यह एक गंभीर विषय है। जम्मू-कश्मीर की जनता को 400 करोड़ रुपये के खर्च के बारे में बताया जाना चाहिए।
मंत्री डार ने जवाब में कहा कि मिशन के तहत कश्मीर संभाग में 3665 हेक्टेयर और किश्तवाड़ की 50 हेक्टेयर भूमि को केसर क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया था। मिशन के तहत सिंचाई व्यवस्था सुदृढ़ कर चिह्नित भूमि को और बेहतर बनाना था। यह काम 2548.75 हेक्टेयर में ही हो पाया। 1116.25 हेक्टेयर पर काम नहीं हो सका। छूट गए क्षेत्रों पर काम करने की जरूरत है।
मंत्री ने यह भी बताया कि 124 बोरवेल लगाए जाने थे। कृषि विभाग को 85 बोरवेल दिए गए। 39 बोरवेल की निविदा में लोगों ने रुचि नहीं
दिखाई। सरकार की ओर से गठित कमेटी ने पाया कि 77 बोरवेल लंबे अरसे से काम नहीं कर रहे हैं।
श्रीनगर और बडगाम में चार-चार बोरवेल काम करते मिले। यह भी कहा गया इस साल भी मिशन के लिए 10 करोड़ रुपये खर्च होंगे। हम मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लेंगे। उन्होंने कहा कि मिशन में किसानों का भरपूर समर्थन नहीं मिला है।
उत्पादन बढ़ा ः उत्पादन को लेकर सवाल पर मंत्री ने कहा कि 2009-10 में जहां 2.50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर उत्पादन था। भूमि सुधार किए जाने के बाद 2023 में रिकाॅर्ड 4.42 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर उत्पादन हुआ। केसर पार्क/आईआईकेएसटीसी को स्थापित करके केसर का उत्पादन मूल्य 2021-22 के 80,000 रुपये से बढ़ाकर 2,20,000 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया।
यह है पीएम केसर मिशन
पीएम केसर मिशन की शुुरुआत केंद्र सरकार ने 2011 में की थी। इसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में केसर की खेती को बढ़ावा देकर किसानों को आर्थिक तौर पर मजबूत बनाना है। शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (स्कास्ट-कश्मीर) की ओर से तैयार की गई योजना को कृषि मंत्रालय भारत सरकार की ओर से लाया गया। मिशन में भारत सरकार की हिस्सेदारी 315.99 करोड़ और किसानों की 84.12 करोड़ रुपये है। मिशन के तहत 269.915 करोड़ रुपए जारी किए जा चुके हैं। अब तक 259.6756 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।