बसपा 1996 के इतिहास को दोहराने की रणनीति बनाने में जुटी है। उस समय विधानसभा चुनाव में बसपा के खाते में भद्रवाह, कठुआ, सांबा और आरएसपुरा सीट आई थी। वर्ष 2002 में यह संख्या घटकर सिर्फ एक रह गई।
इसमें विजयपुर से मंजीत सिंह को बसपा से जीत मिली थी। लेकिन अब दोबारा चुनाव मैदान में बसपा पूरा जोर लगाने में जुटी है। पार्टी जम्मू संभाग के विधानसभा क्षेत्रों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही है। इसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती की कई रैलियां करवाना प्रस्तावित है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 1996 में हुए विधानसभा चुनाव में बसपा को भद्रवाह से शेख अबजल रहमान, कठुआ से सागर चंद, सांबा ने सोमनाथ और आरएस पुरा से राम चंद भगत को सफलता मिली थी। एक राष्ट्रीय स्तर की पार्टी के लिए पहली बार चार सीटें मिलना बड़ी उपलब्धि थी। इस बार भी बसपा जमीनी स्तर पर पूर्व के इतिहास को दोहराने के उद्देश्य से काम कर रही है।
पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष तुलसी दास लंगेह ने दावा किया कि पार्टी दस से ज्यादा सीटों पर कामयाबी हासिल करेगी। पार्टी ने जम्मू और कश्मीर में अधिकांश सीटों पर अपनी प्रत्याशी उतारे हैं। पिछली बार भी करीब पांच सीटों पर बसपा प्रत्याशी कम वोटों से पराजित हुए थे। पार्टी जम्मू के साथ हो रहे भेदभाव के मुद्दे पर काम कर रही है।
इसके अलावा बाढ़ त्रासदी में पीड़ितों को उचित मुआवजा दिलाना पार्टी के एजेंडे में शामिल है। देशभर में ओबीसी आरक्षण के लिए मंडल कमीशन की रिपोर्ट को लागू किया गया है।
लेकिन जम्मू-कश्मीर में ओबीसी लोगों को इससे वंचित रखा जा रहा है। आरक्षण के मुद्दे को जोरशोर से उठाया जाएगा। आगामी दिनों में राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती के जम्मू संभाग में जनसभाएं करवाना प्रस्तावित है।