सीमा सुरक्षा बल की बस के चालक की होशियारी ने कई जवानों की जान बचा दी। चालक दोमाना निवासी दलजीत सिंह को पैर से लेकर सीने तक पांच गोलियां लगने के बावजूद उसने बस को किसी तरह रोक लिया।
जिस स्थान पर हमला किया गया वहां मोड़ तथा चढ़ाई होने के कारण गाडि़यां धीमी होती हैं। आतंकियों की साजिश ड्राइवर को गोली मारकर बस असंतुलित करने की थी।
चालक ने गाड़ी रोकते ही पास के नाले में छलांग लगा दी और फिर मोबाइल से अपने साथियों को जानकारी दी। गोलीबारी रुकने के बाद उसे नाले से निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
वर्ष 1994 में दलजीत का बड़ा भाई पवन सिंह भी (जो सीमा सुरक्षा बल में था) कश्मीर के गांदरबल जिले के मनीगाम में आतंकियों से लोहा लेते हुए घायल हो चुका है।
उसे भी टांग और शरीर के अन्य हिस्सों में गोलियां लगी थीं। इलाज के बाद पवन को सीमा सुरक्षा बल से रिटायर कर दिया गया था।