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बाढ़ से अटक गई महत्वाकांक्षी बीपीएल बीमा योजना

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कश्मीर में बाढ़ से रियासत में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के दूसरे चरण का प्रोजेक्ट लटक गया है। बाढ़ से योजना के लिए कश्मीर के विभिन्न जिलों के जुटाए बीपीएल के रिकार्ड को नुकसान पहुंचा है।
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अब यह प्रोजेक्ट अगले वित्त वर्ष तक खिसक गया है। पिछले एक साल से बीपीएल धारकों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। परिवार कल्याण विभाग जेएंडके के निदेशक डा. बलदेव राज शर्मा के अनुसार बाढ़ से जुटाई गई जानकारी को नुकसान पहुंचा है।

केंद्र सरकार को भी टेंडर प्रक्रिया के लिए कई बार लिखा है। लेकिन दोबारा जानकारी जुटाने में अभी और समय लग जाएगा। राज्य में एक जनवरी 2012 में इस हेल्थ इंश्योरेंस योजना को शुरू किया गया था।
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पहले चरण में हजारों को मिला था लाभ

इसमें पहले चरण में जिला जम्मू और जिला श्रीनगर में इस स्कीम को अमल में लाया गया, जिसमें जिला जम्मू में 30529 और श्रीनगर में करीब पांच हजार बीपीएल लाभार्थियों को स्वास्थ्य बीमा का लाभ दिया गया, लेकिन अगस्त 2013 को स्कीम की अवधि खत्म हो जाने के बाद पिछले एक साल से कोई नया इंश्योरेंस नहीं किया जा सका है।

इस स्कीम के तहत दूसरे चरण में जम्मू और कश्मीर संभाग से छह-छह जिलों को कवर किया जाना था। केंद्र और राज्य सरकार की प्रायोजित इस बीमा योजना में जम्मू संभाग में जिला जम्मू, उधमपुर, रियासी, सांबा, कठुआ, राजोरी और कश्मीर से जिला श्रीनगर, कुलगाम, बड़गाम, अनंतनाग, पुलवामा और गांदरबल शामिल हैं।
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तीस रुपये में मिलता है तीस हजार का इंश्योरेंस

इसमें जम्मू संभाग के अधिकांश जिलों में बीपीएल धारकों की सूची बनाने का काम पूरा कर लिया गया था। इसके अलावा कश्मीर के भी कई जिलों की बीपीएल सूची तैयार की जा रही थी, लेकिन बाढ़ से प्रोजेक्ट को नुकसान पहुंचा है।

इस योजना के तहत लाभार्थी को स्मार्ट कार्ड जारी किया जाता है। इसमें लाभार्थी का 30 रुपये में पंजीकरण किया जाता है। उसे तीस हजार रुपये के हेल्थ इंशोरेंस का लाभ दिया जाता है। कुल प्रीमियम में 348 रुपये में लाभार्थी के 30 रुपये के अलावा अन्य राशि में 10 प्रतिशत राज्य और बाकी केंद्र भुगतान करता है।

स्मार्ट कार्ड में एक बीपीएल परिवार में पति, पत्नी उनके दो बच्चे और परिवार का अन्य एक सदस्य मिलाकर पांच लोगों को संबंधित अस्पतालों में निशुल्क चिकित्सा सुविधाओं का लाभ दिया जाता है।
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