भारी गोलाबारी और चारों तरफ चीखपुकार और आंखों के सामने जिंदगियों को दम तोड़ते देखने के बाद सरहदी इलाकों के लोगों का यहां पाकिस्तान के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा है। वहीं नाराजगी अपनों से भी कम नहीं है। मलाल यहां तक है कि सरकार और प्रशासन जो दिखाता है, वह होता नहीं। राहत शिविरों में असुविधाओं को लेकर भी नाराजगी है तो गोलाबारी में नुकसान झेल रहे लोगों की कोई सुध न लिए जाने पर भी रोष कम नहीं है।
सांबा जिले के सीमावर्ती गांव रंगूर कैंप के सुरजीत सिंह का कहना है कि पाकिस्तान की तरफ से बारिश की तरह बम गिराए जा रहे हैं। लोगों को भागने तक का मौका नहीं मिल रहा। परिवार उजड़ रहे हैं, लेकिन प्रशासन और सरकार केवल लोगों को पीछे चले जाने को कहते हैं।
पीछे कहां जाएं, कहां जगह है। सरकार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जगह दे तो लोग जाने को तैयार हैं। गोलाबारी में जो दुधारू मवेशी मरता है, उसकी कीमत एक लाख तक होती है, जबकि मुआवजा मिलता है दस हजार रुपये।