रियासत में सरकार का हिस्सा बनने का भाजपा ने अकारण ही फैसला नहीं लिया है। इसके गहरे निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। सत्ता के बहाने अलगाववाद के फन को कुचलने की गुगली चाल। यही वजह है कि पार्टी ने तमाम विरोधों के बाद भी अलगाववादी रहे सज्जाद लोन को मौका दिया।
साथ ही आतंकियों के खिलाफ लोगों को एकजुट करने का अभियान चलाने वाले दो विधायकों को भी मंत्रिमंडल में जगह दिलाई। जोरावार सिंह सभागार में शपथ ग्रहण समारोह के बाद सत्ता के गलियारे में मंत्रिमंडल को लेकर चर्चाएं आम हो गईं। राजनीतिक पंडित गठजोड़ के संभावित परिणामों पर चर्चा करने लगे।
कहा गया कि अलगाववादी नेता अब्दुल गनी लोन के बेटे तथा हंदवाड़ा से पीपुल्स कांफ्रेंस के विधायक सज्जाद लोन को भाजपा ने चुनाव से पहले ही मुख्य धारा में शामिल करने की रणनीति बना ली थी। इसी के तहत मोदी से उनकी मुलाकात कराई गई। मंत्रिमंडल में शामिल करने पर पीडीपी की आपत्ति के बाद भी उन्हें जगह दिया गया।