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दो क्लिक में जानिए मुफ्ती के मंत्रिमंडल को

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बाली भगत (भाजपा)
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भाजपा के प्रदेश महासचिव बाली भगत रायपुर दोमाना विधानसभा क्षेत्र से रिकार्ड मतों से जीते हैं। इससे पहले वह रामबन में वर्ष 1996 में विधायक चुने गए। उन्होंने वर्ष 1990 में लोगों को आतंकवाद से लड़ने के लिए प्रेरित किया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के भी वह प्रदेश सचिव रहे हैं।

चौधरी लाल सिंह (भाजपा)
चौधरी लाल सिंह कांग्रेस के पूर्व सांसद रहे हैं। चुनाव पूर्व ही उन्होंने भाजपा का दामन थामा और बसोहली विधानसभा क्षेत्र से जीतकर आए हैं। भाजपा में शामिल होने का लाभ भी उन्हें मंत्री पद देकर पार्टी ने दे दिया है।
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चंद्र प्रकाश गंगा (भाजपा)
भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्र प्रकाश गंगा ने नेशनल कांफ्रेंस के पूर्व मंत्री सुरजीत सिंह सलाथिया को विजयपुर विधानसभा क्षेत्र से हराकर भाजपा का जनाधार बढ़ाया है। मंत्री पद देकर पार्टी ने उन्हें इसका तोहफा भी दिया है।

सुखनंदन कुमार (भाजपा)
सुखनंदन कुमार लगातार दूसरी बार मढ़ विधानसभा क्षेत्र से जीतकर विधानसभा में पहुंचे हैं। उन्हें किसान नेता के रूप में भी जाना जाता है।
 
अब्दुल गनी कोहली (भाजपा)
सेवानिवृत्त अफसरशाह अब्दुल गनी कोहली ने चुनाव पूर्व ही भाजपा का दामन थामा। भाजपा में उन्हें इकलौते मुस्लिम चेहरा होने का लाभ मिला है। वह कालाकोट विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं।

सुनील शर्मा (भाजपा)
किश्तवाड़ विधानसभा क्षेत्र से पूर्व गृह राज्य मंत्री सज्जाद किचलू को हराकर सुर्खियां बटोरने वाले सुनील शर्मा ने किश्तवाड़ दंगों में भी खूब सुर्खियां बटोरीं। उन्हें कट्टर हिंदू नेता के रूप में भी जाना जाता है।

प्रिया सेठी (मनोनीत भाजपा विधायक)
भाजपा ने प्रिया सेठी को मंत्री बनाकर महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है। भाजपा महिला इकाई की अध्यक्ष सेठी को रविवार को ही राज्यपाल ने विधानसभा के लिए मनोनीत किया है।

सज्जाद गनी लोन (भाजपा समर्थक निर्दलीय विधायक)
पीपुल्स कांफ्रेंस के चेयरमैन एवं हंदवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचने वाले लोन कश्मीर में भाजपा समर्थक विधायक हैं। कश्मीर में भाजपा का चेहरा होने की वजह से पीडीपी के ऐतराज के बावजूद भाजपा ने उन्हें मंत्री बनाया है।

शेरिंग दोरजे
विधान परिषद के सदस्य शेरिंग दोरजे को भी भाजपा ने मंत्री बनाया है। लद्दाख से भाजपा का कोई विधानसभा सदस्य न होने की वजह से उन्हें इसका लाभ मिला है।

पवन गुप्ता (निर्दलीय विधायक)
उधमपुर विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक के रूप में चुनाव जीतने वाले पवन गुप्ता पूर्व में भाजपा नेता रहे हैं। विधानसभा चुनाव में पार्टी का टिकट न मिलने से नाराज होकर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीता। राज्यसभा चुनाव में वोटों की जरूरत के चलते भाजपा ने उनसे बात आगे बढ़ाई और समर्थन हासिल किया। इसका लाभ भी उन्हें मिला है।
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यह हैं पीडीपी के मंत्री

हसीब द्राबू (पीडीपी)
राजपोरा विधानसभा क्षेत्र से विधानसभा में पहुंचे द्राबू ने पीडीपी भाजपा गठबंधन में अहम भूमिका निभाई है। भाजपा के वार्ताकार राम माधव के साथ पीडीपी की तरफ से द्राबू ही चर्चा में रहे। उन्हें अर्थशास्त्री के तौर पर भी खास पहचान हासिल है। इससे पूर्व द्राबू ने प्लानिंग कमीशन में एडिटर बिजनेस स्टैंडर्ड के तौैर पर काम किया है।

अब्दुल रहमान भट्ट (वीरी) (पीडीपी)
बिजबिहाड़ा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे वीरी मुफ्ती मोहम्मद के करीबियों में शामिल हैं। पीडीपी कांग्रेस गठबंधन में वह गृह राज्यमंत्री रहे हैं। इस बार इन्हें कैबिनेट मंत्री के रूप में मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री मुफ्ती ने शामिल किया है।

नईम अख्तर (पीडीपी)
पूर्व नौकरशाह रहे हैं। मुफ्ती के करीबी लोगों में गिने जाते हैं। इन्हें मुफ्ती की आवाज भी कहा जाता है। मुफ्ती मोहम्मद सईद जब केंद्र में थे तो यह उनके निजी सचिव और उनके मुख्यमंत्री पद पर रहने पर प्रिंसिपल सचिव रहे। वर्ष 2008 में एनसी के सत्ता में आने पर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर पीडीपी के प्रमुख प्रवक्ता बन गए। वह विधान परिषद के सदस्य हैं।

अल्ताफ बुखारी (पीडीपी)
अमीराकदल विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक बने बुखारी श्रीनगर में बागवानी उत्पादन कर रही एफआईएल इंडस्ट्री नाम से कंपनी के मालिक के रूप में भी मशहूर हैं। पूर्व हार्टिकल्चर बोर्ड निदेशक के पद पर रहे बुखारी ने वर्ष 2005 में पीडीपी का दामन थामा।

अब्दुल हक खान (पीडीपी)
पूर्व एडवोकेट और जनता को नि:शुल्क कानूनी सेवाएं देने वाले खान वर्ष 2003 में पीडीपी में शामिल हुए और महासचिव पद पर रहे। वह मुफ्ती के करीबी हैं। खान लोलाब विधानसभा क्षेत्र से जीतकर विधानसभा में पहुंचे हैं।

चौधरी जुल्फिकार अली (पीडीपी)
घाटी के बाद जम्मू संभाग में पीडीपी को दो बार सफलता देने वाले अली पहले पार्टी के नेता हैं। वह राजोरी से पहली बार विधायक चुने गए हैं। वह मास्टर इन ला में बिजनेस ग्रेजुएट हैं। उन्हें जम्मू खित्ते से कैबिनेट में जगह मिल सकती है।

सईद बशारत बुखारी (पीडीपी)
संग्रामा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचे सईद बशारत बुखारी पीडीपी के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। संग्रामा में चुनाव जीतने का लाभ मुख्यमंत्री मुफ्ती ने उन्हें मंत्री बनाकर दिया है।

मोहम्मद अशरफ मीर (पीडीपी)
सोनावर में पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को हराकर मोहम्मद अशरफ मीर ने खूब सुर्खियां बटोरीं। विधायक बनने से पूर्व वह पीडीपी के विधान परिषद के सदस्य भी रहे हैं।

आसिया (पीडीपी)
हजरतबल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंची आसिया पीडीपी की तरफ से जीत हासिल करने वाली इकलौती महिला उम्मीदवार रहीं। इसका लाभ भी उन्हें मंत्री बनाकर दिया गया है।

गुलाम नबी लोन
चरार ए शरीफ विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे गुलाम नबी लोन  विधान परिषद के चेयरमैन भी रहे है। उन्हें सियासत में लंबा अनुभव हैं और मुख्यमंत्री मुफ्ती ने उन्हें मंत्री बनाया है।

मुस्तफा मीर
बडगाम विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे मुस्तफा मीर लगातार दूसरी बार विधायक बने है। इसका लाभ भी उन्हें मंत्री बनकर मिला है।

अब्दुल मजीद पादर
पीडीपी से लंबे समय से जुड़े मजीद को भी मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने मंत्री पद दिया है। कश्मीर संभाग में अब्दुल मजीद पादर को पीडीपी और मुफ्ती का विश्वास पात्र माना जाता है।
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