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कश्मीरी पंडित हो सकता है भाजपा का चेहरा

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मिशन कश्मीर के तहत भाजपा ने मुख्यमंत्री पद के लिए किसी चेहरे को सामने नहीं रखा है। विधानसभा की 87 में से 44 सीटों को जीतने के लिए जीतोड़ कोशिश हो रही है लेकिन नेता पद के मामले में पार्टी ने खामोशी ओढ़ ली है।
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इससे पहले हरियाणा और महाराष्ट्र में भी सीएम पद का प्रत्याशी चुनाव पूर्व घोषित नहीं किया गया था। जम्मू कश्मीर में भी वही नीति अपनाई जा रही है लेकिन सूत्रों का कहना है कि चुनाव बाद किसी कश्मीर पंडित का नाम आगे किया जा सकता है।

उधर कांग्रेस ने भी सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने का मन बना लिया है। नेशनल कांफ्रेंस की ओर से उमर अब्दुल्ला और पीडीपी से मुफ्ती मोहम्मद का नाम सीएम पद के लिए तय है।
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मोदी कश्मीर में भी लोगों से सीधे जुड़े रहे हैं

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जम्मू कश्मीर पर खासा जोर दिया है। मोदी इस रियासत में भाजपा के प्रभारी रह चुके हैं और जम्मू, कश्मीर तथा लदादख तीनों खित्ते में उनकी दखल रही है। वह कश्मीर में भी लोगों से सीधे जुड़े रहे हैं। पीएम पद संभालने के बाद मोदी चार बार रियासत के दौरे पर आ चुके हैं।

मोदी के इतने दौरे अन्य किसी राज्य में नहीं हुए हैं। कश्मीर पंडितों के पुनर्वास उनके एजेंडे में सबसे ऊपर है। फिलहाल भाजपा के पास रियासत में ऐसा कोई चेहरा नहीं है जिसका जनाधार जम्मू और कश्मीर दोनों खित्तों में हो। सांसद जुगल किशोर शर्मा प्रदेश अध्यक्ष पद पर हैं।

पीएमओ में राज्य मंत्री डा. जीतेन्द्र सिंह पहली बार चुनाव लड़े और जीते हैं। इन नेताओं का जनाधार अपने क्षेत्रों तक ही सीमित माना जाता है। लिहाजा चुनाव बाद बेहतर स्थिति बनती है तो भाजपा की ओर किसी कश्मीर पंडित का नाम आगे किया जा सकता है।
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कश्मीरी पंड़ित को लेकर ये है भाजपा की रणनीति

जम्मू कश्मीर में मुख्यमंत्री पद के लिए हर दल कश्मीरी नाम पर ही जोर देता रहा है। कांग्रेस के कद्दावर नेता गुलाम नबी आजाद जम्मू संभाग के भद्रवाह से हैं। पीडीपी और कांग्रेस के गठबंधन काल में जब उनका नाम मुख्यमंत्री के लिए तय हुआ तब भी कश्मीर बनाम जम्मू का मामला उछला था। बाद में आजाद सीएम बने।

भाजपा की ओर से कश्मीर पंडित को ने नेता बनाए जाने से एक तीर से कई निशाने साधे जा सकते हैं। कश्मीरी पंडितों को घाटी से निकाले जाने के बाद यह मुद्दा पूरी दुनिया में चर्चित हुआ। कश्मीर पंडित को नेता बनाकर इस बिरादरी के पुनर्वास की योजनाएं भी बेहतर तरीके से लागू की जा सकती है।

उधर कांग्रेस आलाकमान ने साफ कर दिया है कि वह गुलाम नबी आजाद और सैफुद्दीन सोज में किसी को सीएम प्रत्याशी के रूप में पेश नहीं करेगी। सोज और आजाद विधानसभा चुनाव भी नहीं लड़ रहे हैं। पहले आजाद को भद्रवाह से उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा थी लेकिन उन्होंने चुनाव राजनीति से बाहर रहकर सभी सीटों पर प्रचार का मन बनाया।
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