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जानिए, क्या है भाजपा के परदे के पीछे का खेल

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विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोट बैंक के बिखराव को रोकने के लिए सियासी दलों की परदे के पीछे की सक्रियता बढ़ गई है। जम्मू कश्मीर मुस्लिम वोट बैंक की बहुलता वाली रियासत है और भाजपा का मिशन कश्मीर गठबंधन सरकार के साझीदार दलों के लिए चुनौती पेश कर रहा है।
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विधानसभा की 87 सीटों में से 50 प्लस हासिल करने के लिए भाजपा ने एड़ी चोटी एक कर दिया है। नतीजतन नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के सामने मुस्लिम वोट बैंक का बिखराव रोकना सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। कश्मीर में अलगाववादियों के वोट बहिष्कार का भी असर रहता है।

ऐसे में कश्मीरी पंडितों का वोट बैंक भाजपा को फायदा पहुंचा सकता है। समीकरणों का संकेत समझ नेकां अब अलगाववादियों से बहिष्कार की अपील वापस लेने को संपर्क साध रही है। पीडीपी का प्रयास भी अलग तरीके से चल रहा है।
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अलगाववादियों से भी साधा जाने लगा संपर्क

मिशन कश्मीर के तहत भाजपा अपने तरकश के हर तीर का सही और सटीक उपयोग करने की रणनीति पर चल रही है। इसके तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को भुनाने की कोशिश होगी। मोदी आठ रैलियां करेंगे और जहां वे नहीं जा पाएंगे, वहां उनकी थ्री डी इमेज लोगों को संबोधित करेगी।

पीपुल्स कांफ्रेंस के चीफ सज्जाद लोन और भाजपा में परस्पर सहयोग पर सहमति बन चुकी है। भाजपा ने अब तक 70 प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की है, जिसमें 32 मुस्लिम हैं।

कश्मीर में भाजपा मोदी के विकास पुरुष की छवि के बूते मुस्लिमों से सीधा संवाद कर रही है और जम्मू में हिंदू वोट बैंक के ध्रुवीकरण पर काम हो रहा है। ऐसे में नेकां और कांग्रेस जम्मू संभाग में किसी कीमत पर मुस्लिम वोट बैंक का बिखराव रोकना चाहती है।
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कुछ सीटों के लिए नेकां और कांग्रेस की ओर से पहल

नेकां और कांग्रेस गठबंधन सरकार में साझीदार रहे हैं। लोकसभा चुनाव साथ-साथ लड़ा और विधानसभा चुनाव में आमने-सामने हैं। जम्मू संभाग में डोडा, किश्तवाड़, भद्रवाह, राजोरी और पुंछ इलाके में मुस्लिम वोट बैंक का असर रहा है। इसलिए इन सीटों पर तालमेल के प्रयास चल रहे हैं। ऐसे प्रयास प्रत्याशियों की घोषणा से पहले भी शुरू हुए थे।

किश्तवाड़ में कांग्रेस ने अपने पुराने प्रत्याशी शेख गुलाम हैदर की जगह ब्लाक अध्यक्ष नेक राम को टिकट दिया। इस सीट से नेकां की ओर से गृह राज्य मंत्री सज्जाद अहमद किचलू प्रत्याशी हैं। भाजपा ने सुनील शर्मा को मैदान में उतारा है। किश्तवाड़ में दंगे के बाद वोटों का ध्रुवीकरण हो सकता है।

 ऐसे में कांग्रेस प्रत्याशी भाजपा के वोट बैंक में ही सेंध लगाएगा, जो नेकां के लिए फायदेमंद स्थिति पैदा कर सकता है। इसी तरह भद्रवाह में कांग्रेस के पूर्व मंत्री नियाज शरीफ और इंद्रवाल में पूर्व मंत्री गुलाम मोहम्मद सरूरी के लिए वोट बैंक के बिखराव को रोकने की कोशिशें शुरू हुई हैं। भाजपा को रोकने की मुहिम कश्मीर में भी तेज है।
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