शहर की परिधि में सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए चार साल पहले लगाए गए बायो टॉयलेट शोपीस बनकर रह गए हैं। वर्ष 2013 में लगभग साढ़े बारह लाख खर्च कर चौक चौराहों पर पांच बायो टॉयलेट स्थापित किए गए थे।
हैरानी की बात है कि चार साल से इन बायो टॉयलेट पर ताला लटका है। साथ ही आसपास गंदगी के ढेर लगए गए हैं। नगर परिषद के कई मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के संज्ञान में लाए जाने के बावजूद बायो टॉयलेट न तो इस्तेमाल हो पा रहे हैं और न ही इन्हें लेकर कोई गंभीरता दिखाई जा रही है।
ऐसा तब है जब पूर्व में स्थापित इन टॉयलेट को खंडहर बनाकर विभाग सुलभ सार्वजनिक शौचालय बनाने पर बल दे रहा है। नगर परिषद के मुख्य कार्यकारी अभियंता संजीव गंडोत्रा ने बताया कि उन्हें फिलहाल इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।
बायो टॉयलेट शायद किसी एनजीओ ने स्थापित किए थे जो इस्तेमाल नहीं किए जा रहे हैं। नगर परिषद अब इनके स्थान पर सुलभ शौचालय तैयार करने जा रहा है।