पीओजेके तथा गिलगित-बाल्तिस्तान को पाकिस्तान के अनधिकृत कब्जे से मुक्त कराने, राज्य के विशेष दर्जे वाले अनुच्छेद 35-ए को बहाल रखने तथा बीफ बैन जैसे मुद्दे पर शनिवार से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में चर्चा नहीं हो सकेगी।
सदस्यों की ओर से पेश इन प्रस्तावों को विधानसभा अध्यक्ष ने खारिज कर दिया है। सत्र में बीफ बैन पर हंगामे की आशंका के मद्देनजर अध्यक्ष की ओर से सर्वदलीय बैठक में इस पर सहयोग मांगा गया है।
विधानसभा सत्र के लिए 35 विधायकों ने प्रस्ताव सौंपे हैं। राज्य विधानसभा सचिवालय की वेबसाइट पर इन प्रस्तावों को अपलोड किया गया है। साथ ही इनमें से कई को खारिज करने तथा कई पर प्राथमिकता के आधार पर चर्चा कराने का जिक्र है।
भाजपा विधायक रविंद्र रैना का भी प्रस्ताव खारिज
भाजपा विधायक रविंद्र रैना की ओर से पीओजेके तथा गिलगित-बालिस्तान का प्रस्ताव दिया गया था जिसे खारिज कर दिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने बीफ बैन का सख्ती से पालन करने तथा सभी गो वधशालाओं को सील करने और लाइसेंस निरस्त करने का प्रस्ताव दिया था जिसे अस्वीकार कर दिया गया है।
भाजपा विधायक राजीव जसरोटिया के भी बीफ बैन संबंधी प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया है। नेकां विधायक देवेंद्र सिंह राणा के अनुच्छेद 35-ए से संबंधित प्रस्ताव को भी अस्वीकार कर दिया गया है।
इसमें कहा गया है कि राज्य सरकार इस अनुच्छेद के लिए सभी विधिक, राजनीतिक और प्रशासनिक कदम उठाए ताकि राज्य के विशेष दर्जा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सके। इंजीनियर अब्दुल रशीद के भी अनुच्छेद 35-ए के संरक्षण संबंधी प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया है।
इन प्रस्तावों पर होगी चर्चा
कुछ प्रस्तावों को प्राथमिकता के आधार पर चर्चा के लिए लेने को भी कहा गया है। इनमें चौधरी कमर हुसैन के अंतर जिला रिक्रूटमेंट बैन को हटाने, सत पाल शर्मा के तवी किनारे से अतिक्रमण हटाने के लिए विशेष अभियान चलाने, जावेद अहमद राना के राज्य में सत्य एवं सुलह आयोग गठित करने, अल्ताफ अहमद वानी के अशमुकाम में ट्रांसफार्मर रिपेयर वर्कशाप स्थापित करने, शमीमा फिरदौस के श्रीनगर शहर में नए सिरे से बीपीएल सर्वे कराने, रणबीर सिंह पठानिया के विधायकों के संवैधानिक अधिकार को बढ़ाने, शाह मोहम्मद तांत्रे के सभी सरकारी तथा निजी स्कूलों में दसवीं तक उर्दू को अनिवार्य करने, गगन भगत के विधायकों के सरकारी वाहनों पर राज्य विधानसभा का झंडा अनिवार्य करने और बशीर अहमद डार के एमएलए तथा एमएलसी के लिए राज्य सचिवालय में स्थान की उपलब्धता सुनिश्चित कराना शामिल है।