विधान सभा के शरद ऋतु सत्र के दूसरे दिन भी सदन में हंगामा हुआ। कार्यवाही की शुरुआत में ही विपक्षी दलों ने बीफ बिल के साथ बाढ़ पीडि़तों के मुद्दे को उठाते हुए हंगामा शुरू कर दिया।
उन्होंने गठबंधन सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। स्पीकर के कार्य करने के तरीके की भी आलोचना की। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही को पहले एक बार 10 मिनट के लिए बाद में एक घंटे के लिए स्थगित किया गया।
हंगामे और बीफ बिल को नामंजूरी पर विपक्ष के नेता और नेशनल कांफ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जैसे कहा जा रहा है कि हम सदन की कार्यवाही को सामान्य रूप से चलने नहीं दे रहे, यह गलत है।
हम नहीं, बल्कि सदन के स्पीकर हैं, जो सदन की कार्यवाही को सामान्य रूप से नहीं चलने दे रहे। उन्होंने कहा कि स्पीकर ने अपने विवादित बयानों से साबित कर दिया है कि वह सदन के संरक्षक नहीं।
उमर ने कहा कि एक स्पीकर को जाति, पंथ, धर्म से हटकर फैसले लेने चाहिए। पक्षपात नहीं करना चाहिए। मीडिया में उनके बयानों पर नजर डालें, तो वह पक्षपात कर रहे।
मुफ्ती अपनी सरकार को बचाना चाहते हैं
उमर ने कहा कि हमारी ओर से एक स्थगन प्रस्ताव रखा गया था। यह जानने के लिए कि आखिर बीफ बैन मद्दे को सुप्रीम कोर्ट तक क्यों पहुंचाने के पीछे क्या कारण थे। उमर ने कहा कि अगर विधान सभा क्षमता रखती है, तो उसके अधिकारों को क्यों छीना गया।
उन्होंने कहा कि मुफ्ती अपनी सरकार को बचाना चाहते हैं। इसलिए मुद्दों को सुप्रीम कोर्ट पहुंचाते हैं, इससे पूर्व भी उन्होंने वीमेन बिल को सुप्रीम कोर्ट पहुंचाया, जो अबतक लंबित है। यह भी कहा कि सरकार ने ऐसा इसलिए भी किया, ताकि चर्चा करने की मांग पर वह कह सकें कि मामले न्यायाधीन हैं, लेकिन हम सदन में चर्चा करना चाहते थे।
उमर के अनुसार अगर स्पीकर ने इन कारणों को स्पष्ट करने दिया होता, तो सदन में हंगामा नहीं होता। अगर स्पीकर का यही बर्ताव रहा, तो बदकिस्मती से ऐसे ही हालात बने रहेंगे।
इंजीनियर रशीद ने लगाए आरोप
वहीं विधायक इंजीनियर रशीद ने कहा कि हमें शौक नहीं है हंगामा करने का। कहा कि हमें लोगों की आकांक्षाओं के अनुसार प्रतिनिधित्व करना है। स्पीकर बीफ बैन बिल को लेकर स्पष्ट रुख रखें, जो हमने पेश किया था।
लेकिन, वह आरएसएस के एजेंट की तरह कार्य कर रहे हैं। उनके एजेंडे को बढ़ावा दे रहे हैं। रशीद से पूछे गए सवाल कि उनपर हमेशा सदन में हंगामा करने का आरोप लगाया जाता है, उसका जवाब देते हुए कहा कि हमें शौक नहीं, लेकिन सदन लोगों के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए है।
अगर ऐसा नहीं करने दिया जाएगा, तो ऐसा ही होगा। उन्होंने कहा कि यह जगह खाली आलू, प्याज की कीमतें तय करने के लिए नहीं बनी, बल्कि यहां सियासी, विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा के साथ-साथ लोगों की भावनाओं को लेकर भी चर्चा होनी चाहिए। गौरतलब है कि जैसे हालात बने हुए हैं, उनसे साफ है कि सत्र के बाकी दिन भी हंगामे भरे रहेंगे।