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जम्मू-कश्मीर : दो कमरों के एक स्कूल में पांच साल से चल रहीं दो पाठशालाएं

Sun, 14 Mar 2021 02:25 AM IST
योगेश जोशी राजीव सिंह लंगेह, बाड़ी ब्राह्मणा

सार

  • बस्सी कलां प्राइमरी स्कूल में अलग कक्षाएं लगाकर पढ़ाए जा रहे टांडा प्राइमरी स्कूल के विद्यार्थी।
  • बच्चों को भी हो रही पढ़ाई में पेशानी, स्कूल का कार्यालय भी कबाड़ में तब्दील।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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सरकारी प्राइमरी स्कूल का यह परिसर अनोखा है। कक्षाएं लगाने के लिए स्कूल में कुल दो कमरे हैं और एक-एक कमरे में दो अलग-अलग स्कूल चल रहे हैं। यह भवन वार्ड नंबर सात के बस्सी कलां प्राइमरी स्कूल का है, जहां इमारत के अभाव में टांडा प्राइमरी स्कूल भी चलाया जा रहा है। हैरत की बात है कि यह व्यवस्था पिछले पांच साल से चल रही है। टांडा स्कूल के बच्चे और शिक्षक अपनी इमारत का इंतजार कर रहे हैं। दो कमरों में दो स्कूलों की व्यवस्था बच्चों के साथ साथ शिक्षकों के लिए भी परेशानी का सबब बनी हुई है।

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इमारत नहीं होने की वजह से पांच साल पहले टांडा प्राइमरी स्कूल को बस्सी कलां के प्राइमरी स्कूल में शिफ्ट किया गया था। बस्सी कलां प्राइमरी स्कूल में 22 और टांडा प्राइमरी स्कूल के 18 बच्चे हैं। दोनों स्कूलों के दो-दो शिक्षक हैं। इस स्कूल का कार्यालय भी कबाड़ में तब्दील हो चुका है। सरकार की तरफ से एक प्राइमरी स्कूल में 2 कमरे, एक इंचार्ज का दफ्तर, किचन और बाथरूम होना जरूरी है, लेकिन यहां दो कमरों में दो स्कूल चलने से बच्चों के साथ शिक्षकों को भी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं।

गांव निवासी उत्तम सिंह, बलदेव सिंह और विजय कुमार ने इसे शिक्षा विभाग की लापरवाही बताया है। उन्होंने कहा कि पांच साल से स्कूल के लिए भवन का प्रबंध न किया जाना व्यवस्था पर सवाल है। टांडा प्राइमरी स्कूल के भवन का प्रबंध जल्द से जल्द किया जाना चाहिए।

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बरसात के सीजन में मंदिर में शिफ्ट करना पड़ता है स्कूल...

बस्सी कलां का प्राइमरी स्कूल पहले ही साथ लगते तालाब की समस्या से जूझ रहा है। यहां हर समय गंदगी का आलम रहता है। बरसात में तालाब ओवरफ्लो हो जाता है और पानी कक्षाओं में घुस जाता है। स्कूल को पास ही स्थित मंदिर में शिफ्ट करना पड़ता है। तालाब में उगी झाड़ियों से सांप, बिच्छू और जहरीले कीड़े मकौड़ों का डर बना रहता है।

कोट टांडा प्राइमरी स्कूल की इमारत नहीं होने के कारण बच्चों को खुले आसमान के नीचे पढ़ना पड़ता था। इसके मद्देनजर इस स्कूल को बस्सी कलां प्राइमरी स्कूल में स्थानांतरित किया गया। पांच साल से स्कूल यहीं चल रहा है। अब बस इंतजार है कि टांडा प्राइमरी स्कूल की इमारत जल्द से जल्द तैयार हो जाए। -विनय सिंह, इंचार्ज टांडा प्राइमरी स्कूल

कोट टांडा प्राइमरी स्कूल की इमारत न होने के चलते इस स्कूल को बस्सी कलां के प्राइमरी स्कूल में स्थानांतरित किया गया है। टांडा में जगह न मिलने से इमारत नहीं बनाई जा सकी। स्कूल की इमारत के लिए फंड मंजूर हो चुका है। जल्द ही इमारत का प्रबंध किया जाएगा। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। -गोपाल खजूरिया, जोनल शिक्षा अधिकारी
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