नेशनल कांफ्रेंस के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पीपुल्स कांफ्रेंस के सज्जाद लोन दोनों ही इस सीट पर हक जता रहे थे। दोनों ने एक-दूसरे के ऊपर जमकर हमले किए
बारामुला सीट पर चुनाव के वक्त जो समीकरण थे, वो मतदान से ठीक चार-पांच दिन पहले बदल गए। नेशनल कांफ्रेंस के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पीपुल्स कांफ्रेंस के सज्जाद लोन दोनों ही इस सीट पर हक जता रहे थे। दोनों ने एक-दूसरे के ऊपर जमकर हमले किए। यहां तक कि व्यक्तिगत रूप तौर पर भी। दोनों को यही लगता रहा कि जीत-हार की लड़ाई इन्हीं दोनों के बीच है।
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मतदान के दिन तक भी यह दोनों एक-दूसरे पर ही आरोप प्रत्यारोप लगाते रहे। इस बीच इन दोनों की लड़ाई का फायदा इंजीनियर रशीद को मिल गया। इंजीनियर रशीद के बेटे अबरार ने इन दोनों पर निशाना साधने के बजाय लोगों के दिल में अपने पिता के लिए सहानुभूति पैदा कर दी। इससे इस सीट पर जीत-हार का समीकरण ही बदल गया।
सोशल मीडिया पर मतदान से कुछ दिन पहले एकदम से जेल में बंद इंजीनियर रशीद का नाम वायरल हुआ। युवाओं ने तरह-तरह के नारे देकर रील्स बनाई। एक नारा जोर शोर से लगाया गया। यह नारा था जेल का बदला वोट से लेंगे। इसी बीच इंजीनियर रशीद का बेटा अबरार रशीद अपने पिता के लिए वोट मांगने के लिए निकला। न कोई वीआईपी वाहनों का काफिला न ही कोई नामी व्यक्ति का साथ।
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सादगी और आंखों में पिता के लिए आंसू लिए अबरार ने खुद को इस तरह से पेश किया कि युवाओं से लेकर महिलाओं और बुजुर्गों तक की उसे सहानुभूति मिलने लगी। प्रचार में सड़कों पर अबरार के लिए हुजूम उमड़ने लगा। जो मुकाबला उमर अब्दुल्ला और सज्जाद लोन के बीच था। उसमें एकदम से इंजीनियर रशीद का नाम सबसे ऊपर आने लगा।
मंगलवार को जब बारामुला संसदीय सीट का परिणाम आने लगा तो साफ हो गया कि जो हुजूम रशीद के समर्थन में सड़कों पर उतरा, वो सारा का सारा वोट में तब्दील हो गया। इंजीनियर रशीद के बेटे अबरार की सादगी, पिता की गैर मौजूदगी में परिवार का गुजारा करना, अपनी पढ़ाई से लेकर अन्य खर्चों तक का जिक्र करने जैसी बातों को अबरार ने अपनी तकरीरों में जमकर इस्तेमाल किया। इसने लोगों के अंदर सहानुभूति पैदा कर दी। यही एक बड़ा कारण बन गया, जिसने इंजीनियर रशीद को जीता दिया।
- उमर अब्दुल्ला, नेकां उम्मीदवार, बारामुला सीट
-सज्जाद लोन, जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी उम्मीदवार, बारामुला सीट