जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने सभी निचली अदालतों और अपनी दोनों खंडपीठों में लंबित जमानत अर्जियों की त्वरित सुनवाई को लेकर सख्त कदम उठाए हैं। अदालत ने साफ कर दिया है कि जमानत और अग्रिम जमानत की अर्जी दो महीने के भीतर निपटाई जानी चाहिए। सिवाय उन मामलों के जहां देरी की जिम्मेदारी पक्षकारों की हो। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाईकोर्ट ने यह कदम उठाया है।
हाईकोर्ट रजिस्ट्रार जनरल की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया है कि ऐसे मामले सीधे नागरिकों की आजादी और मौलिक अधिकारों से जुड़े होते हैं। लिहाजा अनिश्चितकाल तक टाले जाने की प्रवृत्ति अब बर्दाश्त नहीं होगी।
इसके बाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल न्यायिक ने आदेश जारी कर जम्मू विंग में लंबित जमानत अर्जियों को अलग-अलग पीठों को बांट दिया है। न्यायमूर्ति संजय धर, न्यायमूर्ति मोहद अकरम चौधरी, न्यायमूर्ति संजय परिहार और न्यायमूर्ति शहजाद अज़ीम को इनके लिए नामित किया गया है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि 27 सितंबर के बाद दायर होने वाली नई जमानत अर्जियों को प्राथमिकता दी जाएगी और इनकी सुनवाई नियमित रूप से की जाएगी।