हिंसाग्रस्त कश्मीर में शांति के लिए केंद्र और रियासत सरकार सभी पक्षों से सहयोग लेने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
सर्वदलीय समिति के दौरे से पहले अनुकूल माहौल के लिए राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद श्रीनगर में कैंप कर रहे हैं। आजाद की सलाह को तरजीह देते हुए केंद्र ने घाटी से बीएसएफ को हटाया। आजाद ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कहा था कि बंदूक के साये में बातचीत का अच्छा संदेश नहीं जाएगा।
एक और बड़ी पहल के तहत पूर्व सदर-ए -रियासत डॉ. कर्ण सिंह वीरवार को श्रीनगर आ रहे हैं। दलीय भावना से ऊपर उठकर डॉ. कर्ण सिंह कश्मीर में शांति के लिए अपने स्तर से सभी पक्षों से बातचीत शुरू करेंगे। वे महाराजा हरि सिंह के पुत्र हैं और कश्मीर में उनका अलग प्रभाव है।
विश्वास बहाली के लिए बीएसएफ को बुलाया गया वापस
प्रधानमंत्री के साथ मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती
- फोटो : PTI
रियासत सरकार समिति के दौरे की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गई है। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने गवर्नर एनएन वोहरा से भी इस पर सलाह मशविरा किया है। कश्मीर के सभी हित धारकों से वार्ता के लिए केंद्र ने नरम रुख अपनाया है। इस बीच, सुरक्षा बल आतंकी गतिविधियों पर सख्ती जारी रखेंगे।
केंद्र ने विश्वास बहाली के लिए बीएसएफ को वापस बुलाने के अलावा दो और महत्वपूर्ण कदम उठाए। एक तो कर्फ्यू हटाया गया और दूसरे अलगाववादी सैयद अली शाह गिलानी के बेटे नईम से एनआईए की पूछताछ को फिलहाल टाल दिया गया है। पाकिस्तान से फंडिंग के मामले में गिलानी के पुत्र से पूछताछ की जानी थी। नरम नीति के तहत एनआईए की टीम को भी दिल्ली बुला लिया गया है। अब सर्वदलीय समिति के दौरे तक एनआईए की जांच पर ब्रेक लग सकता है।
रियासत सरकार के सूत्रों के मुताबिक सर्वदलीय समिति में 35 सियासी दलों के प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं। इसमें क्षेत्रीय दलों के प्रतिनिधि भी होंगे। यह समिति 4 सितंबर को कश्मीर दौरे पर आएगी।
अलगाववादी नेता बातचीत नहीं करने की जिद पर अड़े
प्रेस वार्ता के दौरान महबूबा मुफ्ती और राजनाथ सिंह
- फोटो : PTI
समिति के दौरे से पहले और दौरे के बाद भी विभिन्न दलों के नेताओं के दौरे जारी रहेंगे। ऐसा रणनीति के तहत किया जा रहा है ताकि अलगाववादियों समेत सभी पक्षों से अलग-अलग और सामूहिक बातचीत हो सके।
संविधान के दायरे की शर्त के कारण अलगाववादी केंद्र के प्रतिनिधि से बातचीत नहीं करने पर अड़े हैं और केंद्र भी उनसे वार्ता से परहेज करना चाहता है। लिहाजा, विपक्षी दलों के प्रमुख नेता अलगाववादियों से बातचीत कर सकते हैं। समिति के दौरे के बाद केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान लोजपा नेता की हैसियत से अलगाववादियों से बातचीत हो सकती है।
पासवान लोजपा नेता के रूप में पहले भी उनसे मुलाकात करते रहे हैं। अलगाववादियों से पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री कांग्रेस नेता पी चिदंबरम की मुलाकात अभी तय नहीं हो सकी है लेकिन इसके लिए प्रयास जारी है।