बिश्नाह। किसानों की जागरूकता के लिए स्कॉस्ट की तरफ से गांव देवली में रविवार को जागरूकता शिविर लगाया गया। शिविर में उप कुलपति जेपी शर्मा मुख्य अतिथि शामिल हुए। कार्यक्रम में किसानों को खेती की नई तकनीक के विषय में बताया गया। क्षेत्र के अग्रणी किसानों को खाद भी वितरित की गई। उप कुलपति ने बताया कि इस कार्यक्रम का आयोजन किसानों को खेती के नए तरीके से अवगत कराने के लिए किया। शिविर में डीडीसी सदस्य धर्मेंद्र कुमार भी मौजूद हे। संवाद
किसानों को थी बारिश की जरूरत
रामगढ़। क्षेत्र में रविवार को सुबह से शाम तक बादल छाए रहे। किसानों का कहना है कि अगर बारिश हो जाती तो मैदानी इलाकों में जहां गेहूं की फसल को पानी की जरूरत थी वह कमी पूरी हो जाती। कंडी क्षेत्र में समय पर गेहूं की रोपाई हो जानी थी। क्षेत्र में काफी किसानों ने गेहूं की फसल की रोपाई की एक माह से अधिक समय हो गया है। संवाद
जंगली मवेशियों से फसल बचाने के लिए बनाई रणनीति
परगवाल। गांव सजवाल में रविवार को गांव परगवाल, सजवाल, गवाढ़ और सरवाल के ग्रामीणों ने गेहूं की फसल को जंगली मवेशियों से बचाने के लिए रणनीति बनाई। सरपंच भूपेंद्र सिंह मन्हास मुख्य रूप से उपस्थित थे। नई रणनीति के तहत गांव के कुछ युवकों को जिम्मेदारी सौंपी गई। जो रात को पहरा लगाकर फसल को बचाएंगे।
वहीं फसल पकने पर सभी गांव वाले इनको प्रति एकड़ के हिसाब से गेहूं देंगे। नए पहरेदारों ने बताया कि वह खेत में पहरा करने के बजाय दरिया चिनाब के किनारों पर पहरा लगाएंगे। यहां से जंगली मवेशी आकर फसल पर धावा बोलते हैं, हालांकि इससे पहले भी हर सीजन में ग्रामीण एक जगह एकत्रित होकर अपनी फसल को जंगली मवेशियों से बचाने के लिए रणनीति बनाते हैं। हर बार नई रणनीति के तहत पहरेदारों का चयन होता है। जो जंगली मवेशियों से किसानों की फसल बचाते हैं।
ज्ञात रहे परगवाल कृषि प्रधान क्षेत्र है, यहां के ज्यादातर लोग कृषि पर निर्भर हैं। जंगली मवेशी रात को फसल को नुकसान पहुंचाने के बाद दरिया चिनाब के बीच बने टापू पर चले जाते हैं, जिस कारण गांव वाले हर सीजन में नई रणनीति तैयार करते हैं।
बादल छाने से किसान खुश नजर आए
विजयपुर। आसमान पर बादल छाने से रविवार को किसान बहुत खुश नजर आए। क्योंकि इस समय बारिश की बहुत जरूरत है। मगर शाम तक बादल ही छाए ही रहे, बारिश न होने के कारण किसान चिंतित हो गए। किसानों ने बताया कि इस समय गेहूं की बिजाई चल रही है, बारिश की बहुत जरूरत है। क्योंकि बारिश न होने के कारण गेहूं की बिजाई समय पर नहीं कर पा रहे हैं। इस कारण किसानों को मायूसी का सामना करना पड़ा। संवाद