फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Budget: औसत प्रति व्यक्ति आय घटी

विज्ञापन
विज्ञापन
रियासत जम्मू कश्मीर में साल 2014 में आई बाढ़ से औसत प्रति व्यक्ति आय में कमी आने के साथ साथ राजस्व बसूली में भी भारी गिरावट दर्ज हुई है। कुल मिलाकर 4100 करोड़ से ज्यादा की राजस्व बसूली में कमी आई है। बिजली का राजस्व बसूली का लक्ष्य भी पटरी से उतरकर 2390 करोड़ के लक्ष्य से भटक कर 1527.67 करोड़ तक रह गया है।
विज्ञापन


रियासत 2014 में आई बाढ़ ने रियासती सरकार की आर्थिक हालत को कमजोर करने के अलावा आम आदमी पर कितना असर डाला है। इसका अंदाजा इसी से हो सकता हैं कि पिछले साल रियासत में औसत प्रति व्यक्ति आय 59,279 हजार थी जोकि मौजूदा समय में 58,888 तक पहुंच गई है।

वित्त मंत्री हसीब ए द्राबू की ओर से पेश किए गए बजट में गौर किया जाए तो इसमें कहा गया कि वास्तविक आंकड़े इससे भी खराब हो सकते है। राजस्व बसूली पर भी बाढ़ का सीधा असर पड़ा है। द्राबू का कहना हैं कि 4100 करोड़ की कम आमदनी होने की आशंका है। यहीं नहीं बिजली घाटा भी रियासत में बढ़ गया है।
विज्ञापन


इस साल 4000 करोड़ से ज्यादा बिजली घाटा होने की आशंका तो बनी हुई है। इसके बावजूद बिजली राजस्व बसूली का लक्ष्य ही रास्ता भटक गया है। इस साल राजस्व बसूली का लक्ष्य 2390 करोड़ रखा गया था लेकिन अब तक 1527 करोड़ की राशि ही विभाग जुटा पाया है।

किसानों को कर्ज माफी का तोहफा

पिछले चार सालों से मौसम की मार झेल रहे किसानों के लिए सरकार ने राहत का मरहम लगाया है। बजट में किसानों को राहत पहुंचाने के लिए कई घोषणाएं की गई हैं। किसान क्रेडिट कार्ड पर एक लाख रुपये से कम ऋण लेने वाले किसानों को 50 प्रतिशत की छूट दी गई है। इसके लिए बजट में 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।


इसके लिए शर्त यह रखी गई है कि उनके खाते 31 अगस्त 2014 तक सुचारु रहे हों। साथ ही छूट की राशि 31 मार्च 2015 तक की देनदारी पर बनेगी। छूट की राशि संबंधित बैंक को दी जाएगी जिसने किसान क्रेडिट कार्ड जारी किया है। वित्त मंत्री ने सदन में कहा कि किसान पिछले चार साल से मौसम की मार झेल रहे हैं।

पहले सूखा, फिर बीमारी तथा फिर बाढ़ ने फसलों को चौपट कर दिया। इसके चलते किसानों पर देनदारियां बढ़ गईं और समय से किसान क्रेडिट कार्ड का लोन नहीं चुका सके। ज्ञात हो कि पिछले साल सितंबर में आई बाढ़ से जम्मू और कश्मीर दोनों ही स्थानों पर खेती को भारी नुकसान पहुंचा था।

इसके साथ ही पिछले दिनों बेमौसम की हुई बारिश से भी जम्मू, सांबा और कठुआ में रबी की फसल चौपट हो गई थी।
विज्ञापन

कर्मचारियों में आधी-अधूरी खुशी

रविवार को पेश किए गए राज्य सरकार के बजट में 17 प्रतिशत डीए की किस्त जारी करने की मांग पूरी होने के बावजूद कर्मचारी संगठनों में आधी-अधूरी खुशी है। हालांकि, संगठनों का कहना है कि डेलीवेजरों को पक्का करने, वेतन विसंगतियों को दूर करने की ओर ध्यान नहीं दिया गया है।

जेएंडके गवर्नमेंट इंप्लाइज एंड वर्कर्स ज्वाइंट एक्शन कमेटी राज्य प्रधान बाबु हुसैन मलिक ने कहा कि बजट में क्लेरिकल स्टाफ की वेतन विसंगतियों को दूर करने, डेलीवेजर की पक्का करने की मांग को पूरा करने के लिए कोई योजना तैयार नहीं की है। सरकार ने मेडिकल अलाउंस बढ़ाने की तरफ भी ध्यान नहीं दिया है।

नेशनल मजदूर कांफ्रेंस के प्रधान सुभाष शास्त्री ने कहा कि 17 प्रतिशत डीए देने के एलान का स्वागत करते हैं, लेकिन सरकार ने डेलीवेजरों की मांगों को नजरअंदाज किया है। डेलीवेजरों का वेतन भी बढ़ाया जाना जरूरी है। वाटर वर्कर्स पीएचई इंप्लाइज एसोसिएशन के संभागीय वरिष्ठ उप प्रधान सोमनाथ ने कहा कि बजट में सरकार ने कर्मचारियों की ज्यादातर मांगों को नजरअंदाज कर दिया है।

इसमें सबसे प्रमुख अस्थायी कर्मचारियों का वेतन है। पीएचई विभाग में अस्थायी कर्मचारियों को दो वर्ष से वेतन नहीं जारी किया है। अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारी बनाने के लिए कमेटी बनाने की बात कही है, जबकि पूर्व राज्य सरकारों की तरफ से कई बार कमेटियों का गठन किया गया है, लेकिन मांग अभी तक पूरी नहीं हुई है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें