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उम्मीद योजना के तहत महिलाएं बन रही आत्मनिर्भर

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सांबा के बढेरी में सिलाई कढाई केन्द्र का उदघाटन करते डीडीसी सदस्य ब अन्य - फोटो : SAMBA
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सांबा। केंद्र सरकार की उम्मीद योजना ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रेरित किया है। आज महिलाएं अपने रोजगार चला रही हैं। दिन प्रतिदिन महिलाएं उम्मीद योजना से जुड़ रही हैं।
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तहसील राजपुरा उम्मीद प्रभारी लक्ष्मी देवी के अनुसार उन्होंने घर-घर जारकर महिलाओं को योजना के बारे में जागरूक किया है। महिलाओं का भी इस ओर रुझान बढ़ा है। तहसील राजपुरा में आज उनके 114 ग्रुप में 1173 महिलाएं जुड़ी हैं। एक ग्रुप में दस से 12 महिलाओं को जोड़ा गया है। उन्हें कम ब्याज पर ऋण दिया जाता है। उम्मीद के साथ जुड़ी इंदु बाला ने बताया कि वह घर का कामकाज कर महिलाओं को जागरूक करने के लिए बैठकें करती हैं। नए ग्रुप बनने के लिए महिलाओं को एक सौ रुपये प्रति माह जमा कराना होता है। बाद में जो कुछ भी काम करने के लिए उन्हें आवेदन किया जाता है, उसी के हिसाब से ग्रुप की प्रधान व सचिव के हस्ताक्षर करा कर महिलाओं को ऋण दिया जाता है। जो आसान किश्तों में वापिस करना होता है। ऋण चुकाने के बाद दोबारा वह ले सकती हैं। उन्होंने बताया कि राजपुरा में ही महिला कंचन, सुनीता, अनीता ने स्वयं रोजगार स्थापित किए हैं। जिनमें किराना, सिलाई कढ़ाई और बच्चों के सूट की दुकानें शामिल हैं।
स्वरोजगार चला रही महिला अनीता ने बताया कि उन्होंने उम्मीद योजना में शामिल होकर ऋण लिया व घर के बाहर एक किराना की दुकान खोली। आज वह घर का सारा खर्च दुकान से चला रही हैं। अनीता ने बताया कि उन्हें तत्कलीन उपायुक्त शीतल नंदा ने भी सम्मानित किया। उन्होंने स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
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