जीएमसी और एसोसिएटेड अस्पतालों के सामने अभी भी वित्तीय संकट बरकरार है। ट्रेजरी (खजाने) से पिछले वित्त वर्ष के बिल का भुगतान न होने से प्रिंसिपल, प्रशासक और चीफ अकाउंट आफिसर के बीएसएनएल के लैंडलाइन फोन ठप पड़े हैं। पेट्रोल वालों से पांच मई तक का समय लिया गया है। फरवरी माह का करोड़ों रुपये का वेतन अभी फंसा हुआ है।
हालांकि, नए वित्त वर्ष का नान प्लान बजट पहुंच गया है, लेकिन इसमें मार्च और अप्रैल के ही वेतन पर कुछ किया जा रहा है। ट्रेजरी से पिछले वित्त वर्ष के बिल का भुगतान न होने से दस करोड़ रुपये से अधिक की राशि लैप्स हो गई। इसमें मेडिकल कालेज जम्मू (जीएमसी) से डाक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ का फरवरी माह के वेतन की साढ़े सात करोड़ रुपये की बड़ी राशि शामिल है।
ट्रेजरी से 25-31 तारीख तक अमूमन वेतन के बिल को क्लीयर किया जाता है जिससे उम्मीद है कि मार्च और अप्रैल का वेतन जारी किया जाएगा। बकाया फरवरी माह के वेतन के लिए भी सरकार को लिखा गया है। इसके अलावा 1-5 तारीख को अन्य बिल का भुगतान किया जाता है, जिससे टेलीफोन, पेट्रोल और अन्य बिलों का भुगतान पांच मई तक ही संभव हो पाएगा।
एसोसिएटेड अस्पतालों की एंबुलेंस के लिए पेट्रोल मालिकों को पांच मई तक बिल क्लीयर करने का भरोसा दिलाया गया है। इसमें अकेले जीएमसी के ही पेट्रोल के करीब छह लाख रुपये के बिल बकाया हैं। इसके अलावा करीब बीस हजार रुपये बीएसएनएल की देनदारी है। एसोसिएटेड अस्पतालों में एसएमजीएस में भी करोड़ों रुपये के बिल अभी लटके हैं। इन पर पांच मई तक कुछ होने की उम्मीद है।
सरकार की ओर से जनरल बजट प्लान में 25 फीसदी राशि में करीब आठ करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। फरवरी माह का वेतन का बिल क्लीयर न होने से डाक्टरों और पैरामेडिकल कर्मियों पर अभी आयकर विभाग के नोटिस की तलवार लटक रही है।