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जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव जल्द: शाह बोले- मतदाता सूचियां हो रहीं तैयार, प्रकाशन होते ही तैयारियां शुरू

Wed, 05 Oct 2022 07:00 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर

सार

प्रदेश में विधानसभा चुनावों के बारे में गृहमंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूचियां तैयार करने की प्रक्रिया पूरी करवाई जा रही है। इसके बाद जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव पारदर्शिता के साथ कराए जाएंगे। शाह ने वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने आतंकवाद को लगभग समाप्त कर दिया है।
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गृहमंत्री अमित शाह बारामुला में जनसभा के दौरान - फोटो : पीआरओ
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विस्तार
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को बारामुला में जनसभा के दौरान कहा कि जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव जल्द होंगे। नई मतदाता सूचियों के प्रकाशन का काम पूरा किया जा रहा है। मतदाता सूची बनते ही चुनाव आयोग अपना काम शुरू करेगा। 

मैं पाकिस्तान नहीं, जम्मू-कश्मीर  के लोगों से बात करूंगा 

उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि कुछ लोग जिन्होंने सात दशक तक यहां शासन किया, वे मुझे पाकिस्तान से बात करने की सलाह देते हैं। पर मैं पाकिस्तान से बात नहीं करना चाहता। मैं प्रदेश के गुज्जर-बक्करवालों और कश्मीर के युवाओं से बात करना चाहता हूं।

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प्रदेश में विधानसभा चुनावों के बारे में उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूचियां तैयार करने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव पारदर्शिता के साथ कराए जाएंगे।

शाह ने वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने आतंकवाद को लगभग समाप्त कर दिया है। उन्होंने युवाओं से आतंकवाद का रास्ता छोड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि आतंकवाद के रास्ते पर नहीं, विकास की राह पर चलने की जरूरत है।
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उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि अगर आप लोगों के इलाके में कोई आतंकवाद के रास्ते पर जाता है तो उसे समझाएं कि आतंकवाद से कश्मीर को कोई फायदा नहीं होगा। कश्मीर को लोकतंत्र, यहां स्थापित होने वाले उद्योगों और अन्य विकास कार्यों से ही फायदा होगा। 

तीन परिवार रहे निशाने पर

शाह ने कहा कि हाल ही में की गई परिसीमन प्रक्रिया से पहले केवल तीन परिवार अब्दुल्ला, मुफ्ती और गांधी सत्ता में आते थे, लेकिन चुनाव आयोग द्वारा परिसीमन के परिणामस्वरूप आपके अपने प्रतिनिधि चुनाव जीतेंगे और शासन करेंगे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में विकास की कमी के लिए अब्दुल्ला (नेशनल कॉन्फ्रेंस), मुफ्ती (पीडीपी) और नेहरू-गांधी (कांग्रेस) के परिवारों को दोषी ठहराया क्योंकि उन्होंने देश में अधिकांश वर्षों तक तत्कालीन राज्य पर शासन किया था। 

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