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मोदी के मिशन कश्मीर के लिए क्या है संघ का मास्टर प्लान?

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भाजपा ने जब कश्मीर के लिए मिशन 44 प्लस का ऐलान किया था, तब किसी भी दल ने इस पर ज्यादा गंभीरता नहीं दिखाई, लेकिन अब संघ परिवार रणनीति पर अमल में जुट गया है। मुस्लिम बहुल इस रियासत में भाजपा के लिए अकेले दम पर बहुमत पाने की राह कठिन है।
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लेकिन बाधाओं को पार करने के लिए संघ परिवार ने मास्टर प्लान तैयार कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस रियासत में पहले भाजपा के प्रभारी रह चुके हैं। मोदी पहले से ही न सिर्फ जम्मू संभाग बल्कि कश्मीर और लद्दाख के भूगोल से भलीभांति परिचित हैं।

वे लंबे अरसे से घाटी का सियासी तापमान मापते रहे हैं। अब कश्मीरी पंडितों, सिखों, शिया और गुज्जरों के वोट बैंक को साधने में संघ परिवार ने पूरी ताकत झोंक दी है। संघ के प्रचारक कश्मीरी पंडितों से संपर्क साध रहे हैं।
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शिया, सिखों और गुज्जरों के वोट बैंक पर भरोसा

कम मतदान की स्थिति में कश्मीरी पंडितों और सिखों का वोट बैंक अहम भूमिका निभा सकता है। भाजपा ने पहली सूची में हब्बाकदल से आल इंडिया कश्मीरी समाज के अध्यक्ष मोती कौल को मैदान में उतारा है।

कौल देश के जाने माने इंजीनियरिंग कंसल्टेंट हैं और मुबंई में उनका व्यापारिक प्रतिष्ठान है। इसी तरह राफियाबाद से देश कुमार नेहरू को प्रत्याशी बनाया गया है। प्रत्याशियों की अगली सूचियों में भी कुछ कश्मीरी पंडितों के नाम हो सकते हैं।

श्रीनगर की आसपास की सीटों पर कश्मीरी पंडितों का अच्छा खासा वोट बैंक है। पहले कश्मीरी पंडितों की मतदान में बहुत अधिक दिलचस्पी नहीं रही है। इस बार संघ परिवार का हर आनुशांगिक संगठन कश्मीरी वोट बैंक से अधिकतम मतदान कराने की रणनीति पर काम कर रहा है।

छोटे दलों पर टिकी हैं भाजपा की निगाहें

भाजपा की ओर से महासचिव राम माधव ने श्रीनगर का दौरा किया है। इस दौरे में छोटे कश्मीरी दलों से भी चुनावी रणनीति पर बात हुई है। भाजपा ने पहली सूची में कश्मीर से नौ और पीर पंजाल से चार मुस्लिम प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है।

नेकां, पीडीपी और कांग्रेस को चुनौती देने के लिए राजोरी-पुंच की सात सीटों में से चार पर मुस्लिम चेहरे हैं। हाल में पूर्व आई फारूक खान, हीना भट, द्रक्षन अंद्राबी, अब्दुल गनी कोहली, चौधरी तालिब और ताज मोहम्मद जैसे मुस्लिम चेहरे को पार्टी में शामिल किया गया।

भाजपा के चलो चलें कश्मीर, मोदी के साथ वाले नारे के तहत हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को भी मिशन कश्मीर में लगाया जा रहा है जो इस इलाके में 9 साल प्रचारक रहे हैं।

सज्जाद और भाजपा में पक रही खिचड़ी

भाजपा महासचिव जे पी नड्डा और राम माधव ने पीपुल्स कांफ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन से मुलाकात कर चुनाव बाद की रणनीति तैयार की है। लोन पहले अलगाववादियों के संपर्क में रहे हैं और पहली बार चुनाव की मुख्य धारा में शामिल हुए हैं। वह खुद हंदवाड़ा से लड़ रहे हैं। उनके 11 प्रत्याशी हैं। कुपवाड़ा में उनके दल का खास प्रभाव माना जाता है।

इस प्रकार वह कम से कम छह-सात सीटों पर असर डालने की क्षमता रखते हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने शेख अब्दुल्ला और मुफ्ती मोहम्मद के परिवार से कश्मीर को निजात दिलाने का ऐलान किया है। इसलिए छोटे दलों से मदद लेने की रणनीति पर काम हो रहा है।
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माधव और मीर की हुई गोपनीय मुलाकात

भाजपा महासचिव राम माधव ने कश्मीर के अपने दूसरे दौरे में छोटे दलों के नेताओं से मुलाकात कर चुनाव बाद गठबंधन की संभावना तलाशी। उन्होंने पीपुल्स कांफ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन के अलावा कृषि मंत्री गुलाम हसन मीर से भी मुलाकात की। पूर्व में मीर का नाम उस विवाद में आया था जिसके तहत उमर अब्दुल्ला की सरकार को गिराने के लिए उन्हें एक करोड़ देने की बात कही गई थी।

मीर डेमोक्रेटिक पार्टी नेशनलिस्ट के अध्यक्ष हैं और कांग्रेस के एसोसिएट सदस्य के रूप में मंत्रिमंडल में हैं। राम माधव की भेंट पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट के चीफ और पूर्व मंत्री हाकिम यासीन से भी हुई। यासीन और मीर ने इस मुलाकात की पुष्टि की है।

सूत्रों के मुताबिक लोन, मीर और यासिन ने चुनाव पूर्व गठबंधन से तो इनकार किया लेकिन चुनाव बाद समर्थन पर सहमति जताई है। माधव दो माह पहले भी श्रीनगर के गोपनीय दौरे पर गए थे और उस क्रम में भी कश्मीरी नेताओं से उनकी मुलाकात हुई थी।
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