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छह साल की दोस्ती पर अब एक दूसरे के दुश्मन

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विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। भाजपा, कांग्रेस को छोड़कर शेष सभी प्रमुख पार्टियों नेशनल कांफ्रेंस (नेकां), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी), पैंथर्स पार्टी के लड़ाके मैदान में उतर चुके हैं। लोक लुभावन वायदे किए जा रहे हैं।
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सरकार में साथ रहकर छह साल तक रियासत में शासन करने वाली पार्टियां नेकां और कांग्रेस धुर विरोधी के रूप में जंग-ए-मैदान में हैं। नेकां ने तो गठबंधन की सरकार चलाने में आड़े आ रही अड़चनों पर खुलकर बोलना भी शुरू कर दिया है।

पार्टी अवाम को आगाह भी कर रही है कि बहुमत की सरकार बनाने में नेकां का साथ दें। गत मई में हुए आम चुनाव में लोकसभा की छह सीटों में जम्मू, उधमपुर तथा लद्दाख की सीट पर भाजपा ने कब्जा किया तो श्रीनगर, अनंतनाग और बारामूला में पीडीपी ने जीत हासिल की।
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चुनाव आते ही खत्म हो गई सालों पुरानी दोस्ती

कांग्रेस तथा नेकां को इन छह सीटों पर पराजय का सामना करना पड़ा। विधानसभा में कश्मीर संभाग में 47, जम्मू में 36 तथा लददाख में चार सीटें हैं। चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि जम्मू संभाग में लोकसभा परिणामों के आधार पर भाजपा का पलड़ा मजबूत हो सकता है, लेकिन यहां कांग्रेस, पीडीपी तथा पैंथर्स पार्टी के प्रभाव वाले भी विधानसभा क्षेत्र हैं।

कश्मीर में नेकां तथा पीडीपी का प्रभाव है। यहां कश्मीरी विस्थापित पंडितों के बल पर भाजपा कुछ विधानसभा सीटों पर सेंधमारी करने में जुटी है। पार्टी का मानना है कि कश्मीरी विस्थापितों ने यदि साथ दिया तो चमत्कारिक परिणाम भी आ सकते हैं।

हालांकि, पार्टी लोकसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र तथा हरियाणा के परिणामों से बेहद उत्साहित है। पार्टी के राज्य प्रभारी अविनाश राय खन्ना स्वयं दावा करते हैं कि पार्टी मिशन 44 प्लस का लक्ष्य आसानी से हासिल कर लेगी।

हर कोई कर रहा विकास का दावा

भाजपा रियासत में भयमुक्त, भ्रष्टाचार मुक्त तथा भूख मुक्त राज्य के लिए जनता की अदालत में है। नेकां ने जनहित में कराए गए विकास कार्यों, कल्याणकारी कार्यक्रमों तथा सरकार के कामकाज के आधार पर वोट मांगने का फैसला किया है।

कांग्रेस सूबे के सर्वांगीण विकास और यूपीए सरकार की उपलब्धियों को भुनाने में जुटी है। पार्टी का मानना है कि कांग्रेस शासनकाल में रियासत में विकास की गंगा बही थी। इसी को आधार बनाकर जनता की चौखट पर जाएंगे। उधर, मुख्य विपक्षी पार्टी पीडीपी रियासत सरकार की विफलता को मुद्दा बना रही है। पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती नेकां-कांग्रेस गठबंधन सरकार को हर मोर्चे पर विफल बताते हुए इनसे सचेत रहने का आह्वान कर रही हैं। साथ ही भाजपा भी उनके निशाने पर है।

रियासत में भाजपा का जनाधार नहीं होने का दावा करते हुए वह कश्मीरी पंडितों पर डोरे डाल रही है ताकि कई सीटों पर निर्णायक स्थिति में होने के कारण एकमुश्त वोट उनकी झोली में जाए।
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मौजूदा विधानसभा की तस्वीर

नेकां 28
कांग्रेस 17
भाजपा 11
पीडीपी 21
सीपीएम 01
जेकेडीपीएन 01
पीडीएफ 01
पैंथर्स 04
अन्य 03
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