विधानसभा सत्र का दूसरा दिन जहां पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद सहित नौ नेताओं के श्रद्धांजलि संबोधन को समर्पित किया गया वहीं श्रद्धांजलि संबोधन में शामिल किए गए प्लेबिसाइट फ्रंट के सदस्य रहे मोहम्मद खलील जोहर और प्रजा परिषद के सदस्य रहे ठाकुर सहदेव के नाम अपने आप में दिलचस्प रहे।
विधानसभा के स्पीकर कवींद्र गुप्ता ने 1960 के दशक में प्लेबिसाइट फ्रंट के सदस्य रहे मोहम्मद खलील जोहर के नाम का जिक्र किया। इस फ्रंट ने राज्य की अवाम को आत्मनिर्णय का अधिकार देने की वकालत करते हुए जनमत संग्रह पर जोर दिया था ताकि लोग अपना भविष्य खुद निर्धारित कर सकें।
वहीं स्पीकर ने जम्मू कश्मीर के भारत में पूर्ण विलय की वकालत करने वाले प्रजा परिषद और आरएसएस संगठन के सदस्य रहे ठाकुर सहदेव का नाम भी संबोधन में शामिल किया।
आवामी इतिहाद पार्टी (एआईपी) और लंगेट से निर्दलीय विधायक इंजीनियर रशीद ने वीरवार को विधानसभा में कश्मीर विवाद का हल निकालने के लिए जनमत संग्रह कराने की मांग की। सदन में पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद को श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने कहा कि मुफ्ती साहब एक वफादार भारतीय थे और भारतीय होना कोई अपराध नहीं।
जब 1990 में डॉ. फारूक अब्दुल्ला और उनके अन्य साथी कश्मीर छोड़कर चले गए थे, मुफ्ती मोहम्मद भारत के गृह मंत्री बने और खारब हालात को संभालने में सहायता की।
कहा कि अगर फारूक अपने आपको भारतीय कहते हैं तो मुफ्ती मोहम्मद अपने आप में ही भारत थे। इंजीनियर रशीद ने स्पीकर की ओर इशारा करते हुए कहा कि अगर आप लोग यह दावा करते हैं कि 80 प्रतिशत लोगों ने लोकतंत्र में विश्वास दिखाते हुए मत का इस्तेमाल किया है तो आप जनमत संग्रह की चुनौती को कबूल क्यों नहीं करते।