बापू आसाराम भगवती नगर आश्रम केस की जांच कर रही सिट के इंचार्ज को हाईकोर्ट ने तलब किया है। विक्रम शर्मा की ओर से दायर अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के जस्टिस बंसी लाल भट ने कहा कि सिट को केस के आरोपी को पकड़ने के सभी प्रयास किए जाएं और जांच को एक तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाए। साथ ही अदालत को केस की जांच रिपोर्ट के बारे में प्रत्येक सप्ताह सूचित किया जाए।
अदालत ने मामले की सुनवाई 22 अप्रैल 2016 को मुकर्रर की और इंचार्ज को सीडी फाइल के साथ उपस्थित होने को कहा। उल्लेखनीय है कि याची ने अदालत से आग्रह किया कि गृह सचिव, डीजीपी, एसपी सिटी नार्थ और एसएचओ नवाबाद के खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाए।
पुलिस के अनुसार विक्रांत शर्मा ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने लिखित शिकायत की कि वह भगवती नगर का रहने वाला है और वह हमेशा बापू आसाराम के आश्रम में जाता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात आश्रम में रहने वाले विनोद कुमार गुप्ता उर्फ भोला नंद भोला नाथ से हुई। वह वर्ष 2008-09 तक आश्रम में इंचार्ज थे।
सितंबर 2013 में जब आसाराम गिरफ्तार किए गए तो भोला नाथ ने उनसे लगातार मोबाइल पर संपर्क किया और बापू आसाराम को फंसाने के लिए उनके खिलाफ कुछ सबूत जमा करने में मदद करने को कहा। पहले तो वह भोला नाथ की बातों से आश्चर्यचकित हो गया। उसके बाद शिकायतकर्ता को लगा कि बापू आसाराम को फंसाने की साजिश की जा रही है। उसने आश्रम के नरिंदर सिंह से संपर्क किया और सारी बात बताई।
उसके बाद उनकी सलाह पर भोला नाथ के फोन की बातचीत रिकार्डिंग शुरू की। इसी दौरान भोला नाथ ने कुछ लड़कियों या महिलाओं का इंतजाम करने को कहा, जो आसाराम पर गलत आरोप लगा सकें। उनकी पहचान को छुपा कर रखा जाएगा। उसने शिकायतकर्ता को कहा कि वह कुछ सबूत जमा करने में उसकी मदद करे, ताकि आसाराम के पूरे परिवार को जेल भेजा जा सके।
शिकायत के अनुसार भोला नाथ ने न्यूज चैनल में बयान दिया कि आश्रम में बच्चों को दफनाया गया है। इसके लिए उसने शिकायतकर्ता को कुछ लोगों के पिंजर लाने की व्यवस्था करने को कहा। उसने उसे किसी मुस्लिम कब्रिस्तान से पिंजर निकाल यहां दफनाने को कहा।
भोला नाथ ने सूचित किया कि उसे किसी ने पैसे नहीं दिए। मीडिया भी वादे के अनुसार पैसे देने से मुकर गया। भोला नाथ ने कहा कि वह बाहर जा रहा है और आसाराम के खिलाफ सबूत जमा करेगा।