पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी करने के मामले में बीएसएफ के एक इंस्पेक्टर से भी पूछताछ की जा रही है। सूत्रों का दावा है कि मामले में गिरफ्तार बीएसएफ के हवलदार अब्दुल रशीद के सुपरवाइजर इंस्पेक्टर अब्दुल खलील को इसकी जानकारी थी।
जासूसी प्रकरण में इंस्पेक्टर की मिलीभगत भी सामने आ सकती है। पुलिस सूत्राें की मानें तो मामले में तीन से चार लोगों की जल्द ही गिरफ्तारी हो सकती है। वहीं, मामले की पड़ताल में चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि अब्दुल रशीद उर्फ खान एक समय खूंखार आतंकवादी रहा है।
बताया जा रहा है कि करीब तीन वर्ष तक वह आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा था। उसने पाकिस्तान में आतंकवाद की ट्रेनिंग भी ली थी। अपराध शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रशीद वर्ष 1990 से पहले आतंकवादी था। बीएसएफ ने वर्ष 1990 में आतंकवाद का रास्ता छोड़कर बीएसएफ में भर्ती करने की स्कीम निकाली तो ये बीएसएफ में भर्ती हो गया।
इसकी तैनाती गुजरात और पश्चिमी बंगाल में बार्डर पर रही। वर्ष 1998 में इस तबादला जम्मू-कश्मीर में हो गया। वर्ष 2012 में इसकी तैनाती बीएसएफ की राजोरी स्थित विजिलेंस विंग में हो गई। इस विंग में गुप्त सूचनाएं काफी होती हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार रशीद कई बार गुप्त सूचनाएं सरकारी मेल से भेजता था।
देश भर में फैला हुआ था नेटवर्क
पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई के जासूसी करने वाले इस गिरोह का नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ था। आरोपी न केवल जम्मू-कश्मीर बल्कि असम, आंध्रप्रदेश, गुजरात आदि जगहों से भी सूचना इकट्ठा कर रहे थे। इनके अलावा छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से लगे हुए इलाकों से भी सूचना इकट्ठा करने के लिए संपर्क कर रहे थे।
इन राज्यों में ये जिन लोगों से गुप्त सूचनाएं व दस्तावेज ले रहे थे उन आरोपियों की पहचान कर ली गई है। दिल्ली पुलिस की टीमें जम्मू-कश्मीर, आंध्र प्रदेश, छत्तसीगढ़, गुजरात और पश्चिमी बंगाल समेत देश में कई जगहों पर छापामारी कर रही है। इस मामले में जल्द ही तीन से चार लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।
दिल्ली पुलिस अधिकारिक रूप से कह रही है कि कफायतुल्ला वर्ष 2013 में पाकिस्तान गया था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि वह कई बार पाकिस्तान जा चुका है। वह वर्ष 2015 में भी दो से तीन बार सरहद पार गया था। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि वह वीजा लेकर गया या फिर वह बार्डर पार करके।