सेना की वर्दी का आम लोगों द्वारा जमकर इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रतिबंध के आदेश के बावजूद बाजार में इसकी खुलेआम बिक्री हो रही है। बसों के सीट कवर और सूटकेस कवर तक सेना की वर्दी से बनाए जा रहे हैं। जिला प्रशासन की ओर से साफ तौर पर आदेश है कि सिर्फ सेना के लोग ही इसको खरीद सकते हैं।
अधिकतर आतंकी हमलों में देखा गया है कि सेना की वर्दी पहनकर ही आतंकियों ने हमले किए। इसके बाद जिला पुलिस की ओर से प्रशासन से सिफारिश की गई कि वर्दी की आम बिक्री पर प्रतिबंध लगे। 2015 से लेकर 2017 तक जिला प्रशासन ने चार बार आदेश जारी किया। हर बार जारी होने वाले आदेश में साफ है कि सिर्फ सैन्य कर्मी को ही यह वर्दी मिलेगी।
इसके लिए भी संबंधित दुकानदार को उसका आई कार्ड चेक करने के बाद रजिस्टर पर नोट करना अनिवार्य है, लेकिन शहर में ऐसा नहीं हो रहा है। एक बस की सभी सीटों के कवर वर्दी से तैयार होना एक बड़ा सवाल है। जिस पर इंडियन आर्मी का टैग तक बना हुआ है।