बडगाम गोलीकांड में मृतकों के घरवालों ने सेना द्वारा मुआवजे की घोषणा को ठुकरा दिया है। सेना की उत्तरी कमांड के कमांडिंग इन चीफ डीएस हुड्डा ने शुक्रवार को मृतकों के परिवार वालों को 10-10 लाख और घायलों को 5-5 लाख के मुआवजे की घोषणा की है। रक्षा मंत्रालय की ओर से दिए जाने वाले इस मुआवज़े को मारे गए युवाओं के परिवार वालों ने लेने से इंकार कर दिया।
उन्होने कहा कि वह इस मुआवज़े को ठुकराते हैं। इस घटना में मारे गए फैसल के पिता मोहम्मद युसूफ भट ने कहा कि उनके बेटे का खून इतना सस्ता नहीं कि वह उसके एवज में मुआवजे की राशि ले लूं। भट ने कहा कि अगर ऐसा है तो मैं 20 लाख देने को तैयार हूं, मुझे मेरे बेटे के कातिल सौंप दो।
मौत ने पूरे परिवार को झकझोर दिया है
मोहम्मद युसूफ भट ने कहा कि फैसल सातवीं कक्षा में पढ़ता था। मौत ने पूरे परिवार को झकझोर दिया है।
उसकी कमी कोई भी पूरी नहीं कर सकता। सुरक्षा बलों पर आरोप लगते हुए भट ने कहा कि उनके घर के बाहर भारी संख्या में जवान तैनात हैं जो सांत्वना देने के लिए किसी को भी उनके घर में नहीं दाखिल होने देते।
वहीं 21 वर्ष के मेहराज के पिता गुलाम मोहम्मद डार के अनुसार मुआवजे से उन्हें उनका बेटा नहीं मिलेगा। वह सिर्फ इंसाफ चाहते हैं और मांग करते हैं कि निष्पक्ष जांच हो ताकि उनके बेटे के हत्यारों को सजा मिले।
'जांच कोई भी करे, सेना सहयोग करेगी'
मामले में सेना के जीओसी डीएस हुड्डा ने स्पष्ट किया कि अगर किसी अन्य एजेंसी को भी जांच सौंपी जाती है तो सेना जांच में परा सहयोग करेगी। हुड्डा ने कहा कि सेना द्वारा श्रीनगर में आई बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय अवाम के बचाव और राहत के लिए जो भी काम किए जाते ह्रैं, इस तरह की किसी एक ही घटना से उस सबका प्रभाव शून्य हो जाता है।
हुड्डा ने कहा कि इस बात को स्वीकार कर लेने के बाद कि हमने गोलियां चलाईं और दो युवकों की मौत हो गई, कुछ ज्यादा शेष नहीं रह जाता। फिर भी इस घटना के सभी गवाहों के बयान लिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि घायल युवकों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।
जिला बडगाम के छत्तरगाम इलाके में बीते सोमवार (तीन नवंबर) सेना के नाके पर जवानों द्वारा कार सवार युवकों पर फायरिंग कर दी गई थी।
भविष्य में नहीं होंगी ऐसी घटनाएं
हुड्डा ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होंगी। ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए उन्होंने सिविल सोसायटी से भी सुझाव मांगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस घटना में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
जीओसी ने सेना की ओर से पीड़ित परिवारों को भी पूरी मदद का आश्वासन दिया। उनहोंने बताया कि जिस यूनिट के जवानों द्वारा फायरिंग की गई थी, उसे वहां से हटा दिया गया है। उसकी जगह 35 राष्ट्रीय रायफल्स को वहां तैनात किया गया है।
एक सवाल के जवाब में हुड्डा ने कहा कि इस घटना का सशस्त्र बल विशेष अधिकार कानून का कोई लेना देना नहीं है। मामले की जांच के दौरान देखा जाएगा कि कहां कानूनी तौर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है। उसके बाद ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।