सेना ने शुक्रवार को सीमावर्ती गांव दड़ में 26 किसानों की जमीन से माइन हटकर उसे किसानों को वापस सौंपा। अपनी जमीन पाकर किसानों और उनके परिवारों के चेहरे खिल उठे।
दरअसल 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान सीमावर्ती इलाकों के किसानों की जमीन माइन बिछाने के लिए ली गई थी। इसके बदले में किसानों को सरकार द्वारा राशि प्रदान की गई थी।
आपरेशन पराक्रम के बाद यह निर्णय लिया गया कि किसानों की खेती योग्य जमीन से माइन हटाकर उन्हें किसानों को वापस किया जाए ताकि वे उस पर खेती कर सकें।
मई 2010 में सेना द्वारा जमीन के कुछ हिस्से को माइन मुक्त करके किसानों को सौंपा गया था लेकिन जब एक मवेशी उस जमीन पर घास चरने गया तो माइन ब्लास्ट से एक मवेशी की मौत हो गई।
तब से किसानों ने उस जमीन पर जाना बंद कर दिया। जिस पर दोबारा सेना की क्रास स्वार्ड्स डिवीजन ने 04 डोजर, दो ट्रैक्टर, 9 नान मेटल माइन डिटेक्टर, डीप सर्व मेटल डिटेक्टर आदि की मदद से किसानों की जमीन माइन मुक्त करके उन्हें सौंपी।
इस मौके पर सरपंच गुरदेव सिंह ने सेना का धन्यवाद प्रकट किया। कार्यक्रम में डीसी जम्मू, एसडीएम खौड़ राकेश कुमार मुख्य रूप से उपस्थित रहे।