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सेना के स्कूलों से देश के दिलों में उतरेंगी हिंदुस्तान के जांबाजों की कहानी

Tue, 16 May 2017 01:03 PM IST
श्रेयांश त्रिपाठी,अमर उजाला ब्यूरो/जम्मू
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Army Goodwill School - फोटो : Amar Ujala
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कुलगाम के बेहीबाग स्थित आर्मी गुडविल स्कूल अब लेफ्टिनेंट उमर फैयाज आर्मी गुडविल स्कूल के नाम से जाना जाएगा। कश्मीर के इस स्कूल से देश की सेवा करते शहीद हुए जांबाज की कहानियों से प्रेरणा भी मिलेगी। उमर के नाम पर स्कूल होने से देशभर में खुशी है।
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रविवार को जब अमर उजाला कुलगाम में उमर फैयाज के घर पहुंचा तो गम में डूबे पिता ने सेना के इस कदम पर सराहना की। कहा कि उन्हें फक्र है कि सेना ने स्कूल का नाम उनके बेटे के नाम पर रखा। इससे सारी जिंदगी लोग उसे याद रखेंगे।

सेना के गुडविल स्कूलों की शिक्षा और फैयाज के नाम की प्रेरणा से अब कुलगाम और कश्मीर के बच्चे एक बार फिर अपने सपनों को पूरा करने की राह में बढ़ने को तैयार हैं। सेना के गुडविल स्कूलों में पढ़ने वाले कई बच्चों ने अपनी प्रतिभा के बल पर भारत ही नहीं, विदेशों में भी धाक जमाई है। 
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हिंसा के दौर में भी होती रही पढ़ाई

हिंसा के दौर में भी होती रही पढ़ाई - फोटो : File Photo
किक बाक्सिंग में देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन करने वाली तजामुल इस्लाम सेना के इन्हीं स्कूलों में से एक की छात्रा रही है। तजामुल ने बांदीपोरा स्थित आर्मी गुडविल स्कूल से अपनी पढ़ाई की है।

दरअसल, कश्मीर में बने सेना के कई गुडविल स्कूल कश्मीरी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कुशल शिक्षकों के जरिए उनके सपनों को पूरा करने की मदद देते हैं। सेना के इन स्कूलों में बच्चों को खेल, कला समेत अन्य गतिविधियों से जोड़कर प्रोत्साहित किया जाता है।

कश्मीर में सेना के गुडविल स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई से कभी समझौता नहीं किया गया। वर्ष 2016 में भी कश्मीर में हिंसा के चलते खराब हालात के कारण तमाम स्कूलों को बंद कर दिया गया था, उस दौर में भी घाटी में आर्मी गुडविल स्कूल खुले।  
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