माच्छिल सेक्टर में कुछ साल पहले तक पाकिस्तान के दागे गए बमों के धमाकों की आवाज सुनाई देती थी। आज इस इलाके में आर्मी गुडविल स्कूल (एजीएस) राघवन की घंटियां सुनने को मिलती हैं। लाइन ऑफ़ कंट्रोल (एलओसी) के करीब रहने वाले कई गावों के बच्चे इस स्कूल में पढ़ने के लिए आते हैं। मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों में चल रहे स्कूल का रिजल्ट पिछले पांच साल से 100 प्रतिशत आ रहा है।
श्रीनगर से करीब 180 किमी दूर माच्छिल सेक्टर की एलओसी पर बसे सूंटवारी गांव में आर्मी गुडविल स्कूल की शुरुआत 17 अक्तूबर 2000 में की गई थी। शुरुआत में यह स्कूल 5वीं कक्षा तक था। वर्ष 2004 में इसे 8वीं कक्षा तक अपग्रेड किया गया। इस स्कूल में सूंटवारी, सूंट बाला, सूंट पायीन, डोबन और हाजी मोहल्ला के बच्चे भी पढ़ने आते हैं।
स्कूल का नाम शहीद लेफ्टिनेंट कर्नल एजीएस राघवन के सम्मान में रखा गया है। उन्होंने 24 जून, 1999 में देश की रक्षा में जान न्योछावर की थी। इस स्कूल को सेना की 53 इन्फेंट्री ब्रिगेड द्वारा संचालित किया जा रहा है।अक्तूबर 2019 तक यह इलाका संघर्ष विराम उल्लंघन में गोलीबारी का शिकार रहा।
इन बच्चों की जान पर बन आती थी। अब संघर्ष विराम समझौते के बाद इन बच्चों को सेना द्वारा संचालित स्कूल में आधुनिक तरीके से शिक्षा मिल रही है। एजीएस राघवन स्कूल के प्रिंसिपल कैप्टन बीएस बिरादर ने कहा, स्कूल में बच्चों को शिक्षा के लिए सभी सुविधाएं हैं।
सूंटवारी के मोहम्मद रुस्तम तांत्रे का कहना है कि यह स्कूल एलओसी के बेहद करीब है। गोलाबारी में हम बच्चों को स्कूल नहीं भेज पाते थे। जान का खतरा होता था। अब संघर्ष विराम समझौते के बाद से बच्चे चैन से पढ़ रहे हैं। हमारे बच्चों को यहां जितनी सुविधा है उतनी सरकारी स्कूल में भी नहीं है।