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'मांद' में घुसकर आतंकियों को ठिकाने लगा रही सेना

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गणतंत्र दिवस के मद्देनजर सेना ने आतंकियों के नापाक मंसूबों को नेस्तनाबूद करने की ठान ली है। पिछले पांच दिनों के भीतर कश्मीर के सोपोर और शोपियां जिले में आतंकियों के सफाए का अभियान तेज कर दिया है। इन पांच दिनों में सेना ने आठ आतंकियों को मार गिराया है।
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सेना की तलाशी अभियान का ही नतीजा है कि घरों में घुस कर आतंकियों को मारा जा रहा है। सूत्रों की मानें तो गणतंत्र दिवस को लेकर खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। एजेंसियों ने अपने खुफिया विंग को साफ तौर पर निर्देश जारी किए हैं कि कहीं पर लापरवाही नहीं बरती जाएगी।

कश्मीर के बारामुला में उड़ी के सैन्य शिविर पर हुए हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियां अधिक सतर्क हुई हैं, क्योंकि उड़ी हमले की जानकारी के इनपुट खुफिया एजेंसियों के पास होने के बाद भी हमला हुआ और इतनी बड़ी तबाही हुई।
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आतंकियों को घेर कर किया जा रहा ढेर

सेना को अब भी इनपुट मिल रहे हैं कि गणतंत्र दिवस को लेकर आतंकी राज्य के सैन्य शिविरों, स्कूलों को निशाना बना सकती है। इसलिए खुफिया एजेंसियों ने अपनी सतर्कता बढ़ा दी है, ताकि किसी भी हमले की जानकारी पहले से हो और हमले को नाकाम बनाया जाए।

पिछले पांच दिन के भीतर सोपोर में एक आतंकी को मार गिराया, दो दिन पहले शोपियां में पांच आतंकी मार गिराए और रविवार को भी दो आतंकी मार गिराए। यह सभी आतंकी घरों में पनाह लिए हुए थे। सेना ने कश्मीर संभाग के अति संवेदनशील इलाकों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चला रखा है।

इसी का नतीजा है कि आतंकियों के घरों में छिपे होने की जानकारी मिलने के बाद उन पर कार्रवाई की जा रही है। यह रणनीति इसलिए भी अपनाई जा रही है कि आतंकी कहीं हमला करें, इससे पहले उन्हें ही ढेर कर दिया जाए। आने वाले दिनों में सेना का यह अभियान और तेज होगा। खुफिया एजेंसियों और सेना के तालमेल से आतंकियों के मंसूबों को नाकाम बनाने की तैयारी कर ली गई है।

तीन घंटे चली मुठभेड़ में दो आतंकियों को ढेर क‌िया

श्रीनगर से करीब 60 किलोमीटर दूर उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले के सोपोर में रविवार को हुई भीषण मुठभेड़ में जवानों ने लश्कर के दो आतंकी ढेर कर दिए। मारे गए आतकियों के पास से हथियार भी बरामद किए गए हैं।

एक पुख्ता सूचना के आधार पर सोपोर के सैदपुरा गांव में सेना की 22 राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर), पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) और सीआरपीएफ की 177वीं बटालियन ने साझा तलाशी अभियान चलाया। जैसे ही जवान इलाके में आगे बढ़े, वहां छिपे आतंकियों ने उन पर गोलियां बरसाईं।

गौरतलब है कि रविवार को हुई मुठभेड़ से पूर्व 13 जनवरी को सोपोर के चनखान इलाके में एक आतंकी मारा गया था, जबकि एक दिन बाद शोपियां के केल्लर में हुई मुठभेड़ में पांच आतंकी मारे गए थे। 26 जनवरी के मद्देनजर अतिरिक्त बलों की तैनाती भी की गई है, ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके।

सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की। करीब तीन घंटे चली मुठभेड़ में जवानों ने लश्कर-ए-तैयबा के पाकिस्तानी मूल के दो आतंकियों को ढेर कर दिया। मारे गए आतंकियों की पहचान असदुल्लाह और मोहम्मद रमजान के तौर पर हुई है।

पुलिस के अनुसार असदुल्लाह वर्ष 2014 में घुसपैठ कर कश्मीर पहुंचा था। वह लश्कर के ग्रुप कमांडर के तौर पर काम कर रहा था। उसे जैश के आतंकियों को लश्कर में शामिल करने का कार्य सौंपा गया था।
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रमजान लश्कर से पहले जैश का आतंकी था

पुलिस ने यह भी जानकारी दी कि असदुल्लाह पहले कुपवाड़ा जिले में सक्रिय था। करीब एक माह पूर्व सोपोर में लश्कर की कमान मजबूत करने के लिए आया था। रमजान लश्कर से पहले जैश का आतंकी था।

वह जैश के उस 20 सदस्यीय दल का हिस्सा था जो वर्ष 2013 में घुसपैठ कर उत्तरी कश्मीर में सक्रिय था। रमजान अब उन दो जैश आतंकियों में से एक था, जिन्होंने लश्कर का पल्ला पकड़ लिया था। मारे गए आतंकियों से दो एके-47 राइफल्स,  एके-47 की दो मैगजीन, 140 एके राउंड्स, दो आईकॉम सेट, तीन जीपीएस, दो कप और एक मैट्रिक्स (कोड भाषा वाला चार्ट) बरामद हुआ है।

कश्मीर में वर्ष 2015 की शुरूआत में ही आतंकियों ने गतिविधियां तेज कर दीं हैं। बीते एक सप्ताह में आतंकियों से हुई तीन भीषण मुठभेड़ों में इस साल अब तक आठ आतंकियों को मार गिराया गया है।
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