सेना ने अमशीपुरा में फर्जी एनकाउंटर मामले में दो जवानों के खिलाफ जांच पूरी कर ली है। अधिकारियों के अनुसार मामले में कोर्ट मार्शल हो सकता है। मुठभेड़ में तीन आम नागरिक मारे गए थे।
मुठभेड़ में तीन युवकों के मारे जाने के बारे में सोशल मीडिया पर आयी खबरों के बाद सेना ने जांच का आदेश दिया था। आरोप लगा था कि जवानों ने इन युवकों को आतंकवादी बताकर मुठभेड़ में मार गिराया।
कोर्ट ऑफ इनक्वायरी ने 18 जुलाई को हुई मुठभेड में तीन युवकों के मारे जाने के मामले में सितंबर की शुरुआत में अपनी जांच पूरी कर ली थी और प्रथम दृष्टया ऐसे सबूत मिले कि सैन्य बल विशेषाधिकार कानून (अफ्सपा) के तहत अधिकारों का उल्लंघन किया गया। इसके बाद सेना ने अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की थी।
सूत्रों ने बताया कि अफ्सपा, 1990 के तहत अधिकारों का उल्लंघन करने के लिए दो सैन्यकर्मियों के खिलाफ कोर्ट मार्शल की कार्रवाई हो सकती है। अधिकारियों ने बताया कि आरोपी जवानों को कानून के तहत गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ सकता है। मुठभेड़ में राजौरी जिले के इम्तियाज अहमद, अबरार अहमद और मोहम्मद इबरार की मौत हो गयी थी।
बाद में उनके डीएनए नमूनों की जांच करायी गयी और शवों को अक्टूबर में बारामूला में उनके परिवार के हवाले कर दिया गया। जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा राजौरी में तीनों युवकों के परिवारों से मिलने गए थे और उन्हें ढाढस बंधाया था। उन्होंने परिवारों को आश्वस्त किया था कि उन्हें पूरी मदद दी जाएगी और उन्हें इंसाफ मिलेगा।