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कश्मीर में आईएस को नजरअंदाज नहीं कर सकती सेना: जीओसी

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श्रीनगर स्थित सेना की 15 कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल एसके दुआ ने माना कि आतंकी संगठन आईएस एक जिंदा चुनौती है और सेना उसे नजरअंदाज नहीं कर रही है।
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आईएस के लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के साथ मिलकर घाटी में वारदातों को अंजाम देने की साजिश करने के संबंध में जीओसी का कहना था कि वे फिलहाल इतना ही कह सकते हैं कि इंटेलिजेंस एजेंसियां इसकी लगातार समीक्षा कर रहीं हैं।  

एलओसी से सटे टंगधार में सेना के कैंप पर आतंकी हमले के संबंध में जीओसी ने कहा कि एलओसी पार से आए आतंकियों से बरामद दस्तावेजों से साफ है कि वो सिर्फ सेना के कैंप पर हमला करने के मकसद से ही आए थे।
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टंगधार में बरामद बैगों पर अफजल गुरु ब्रिगेड लिखा हुआ था

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हमलावरों से बरामद बैगों पर अफजल गुरु ब्रिगेड लिखा हुआ था। गौरतलब है कि टंगधार में सेना के कैंप पर हुए हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी। इससे इस बात का अंदेशा लगाया जा रहा है कि जैश कश्मीर में स्थानीय युवाओं की भावनाओं को भड़काकर अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश में है।

टंगधार में सेना के कैंप पर आतंकी हमले के संबंध में जीओसी दुआ ने कहा कि एलओसी पर मजबूत सुरक्षा ग्रिड होने के चलते आतंकियों के लिए घुसपैठ कर पाना संभव नहीं हो पा रहा है। सेना के मजबूत और कई घेरों में बंटी सुरक्षा को भेदना आतंकियों के लिए संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने एलओसी से सबसे करीब स्थित सेना के कैंप पर हमला कर दिया।
    
इस वर्ष घाटी में हुई घुसपैठ के संबंध में जीओसी दुआ ने कहा कि मल्टी एजेंसी सेंटर (मैक) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 25 आतंकी भारतीय क्षेत्र में घुसने में कामयाब हुए हैं। दुआ ने कहा कि अधिकतर आतंकियों को तो मजबूत काउंटर इंशर्जेंसी  ग्रिड के चलते मार गिराया जाता है।
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8 से 10 आतंकी अभी भी हैं कश्मीर में

वहीं हाल ही के दिनों में कश्मीर में आतंकी वारदातें बढ़ने पर जीओसी का कहना था कि आतंकी संगठनों की कोशिश होती है कि बर्फबारी से पहले अधिक से अधिक आतंकियों की घुसपैठ कराई जा सके। यह कोई नई बात नहीं है, ऐसा हर साल होता है।

जीओसी न कहा कि मजबूत सुरक्षा प्रबंधों के चलते आतंकियों की घुसपैठ नहीं हो पा रही है। इसके चलते आतंकी संगठन स्थानीय युवाओं को भर्ती कर यहीं पर प्रशिक्षण दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सेना इस पर रोक लगाने की पूरी कोशिश कर रही है।

 कुपवाड़ा जिले के मनिगाह जंगल क्षेत्र में बीते दो सप्ताह से आतंकियों के खिलाफ सेना का ऑपरेशन जारी रहने पर जीओसी का कहना था कि घना जंगल और दुर्गम इलाका है। दूसरा यह कि सेना की पूरी कोशिश है कि स्थानीय लोगों को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।

इसके चलते पूरी एहतियात बरती जा रही है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन  में 2 आतंकी ग्रुप घेरे में हैं जिनमें 8 से 10 आतंकियों के मौजूद होने की संभावना है। आतंकियों के खिलाफ आपरेशनों में ड्रोन के इस्तेमाल पर उनका कहना था कि सेना आतंकियों की लोकेशन का पता लगाने को सिर्फ यूएवी का इस्तेमाल करती है।
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