रियासत के अलग-अलग इलाकों में स्थित सैन्य शिविरों पर घाटी में छिपे लगभग 250 आतंकियों का खतरा मंडरा रहा है। कश्मीर हिंसा के कारण सेना और सुरक्षा बलों का सर्च आपरेशन बाधित हुआ और ढाई महीने में आतंकियों ने अपने पैर पसार लिए हैं।
उड़ी के बाद बारामुला में फिदायीन हमले ने सैन्य शिविरों पर भावी खतरों की ओर भी इशारा किया है। सेना और सुरक्षा बल अलर्ट पर हैं, लेकिन, घुसपैठ की कोशिशें अब भी तेज हैं।पीओके में सेना के सर्जिकल आपरेशन के बाद एलओसी और बार्डर पर सेना और बीएसएफ की गश्त तेज है।
घुसपैठ की कोशिशों पर सेटेलाइट और ड्रोन से निगरानी की जा रही है। इससे घुसपैठ में कमी आई है। लश्कर-ए तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन घाटी में पहले से मौजूद आतंकियों से हमले को अंजाम दिलवाने की कोशिश कर रहे हैं।
तीन महीने में 100 आतंकी घुसपैठ में सफल
आतंकी
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सेना के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि आतंकी बुरहान वानी की मुठभेड़ में मौत के बाद से अब तक लगभग तीन महीने में 100 आतंकी घुसपैठ में सफल रहे हैं। लगभग 150 आतंकी पहले से अलग-अलग स्थानों पर छिपे हैं।
हिंसा के दौरान पेलेट गन के इस्तेमाल पर उठे विवाद के बाद सुरक्षा बलों ने कुछ दिनों तक नरमी बरती। इसका भी फायदा आतंकियों ने उठाया। आतंकी कई रैलियों में शामिल हुए।
इससे उन्हें स्थानीय संरक्षण भी मिलने लगा। सर्च आपरेशन बाधित होने के कारण आतंकियों को खत्म करने की प्रक्रिया भी बाधित हुई।
कई बार देखे गए हैं संदिग्ध
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जम्मू के राजोरी, पुंछ, सांबा और कठुआ इलाके में भी कई बार संदिग्ध देखे गए हैं। कश्मीर में उड़ी करनाह से लेकर उत्तरी और दक्षिणी कश्मीर में सेना का सर्च आपरेशन अब निरंतर जारी है।
सूत्रों के मुताबिक सर्जिकल आपरेशन के बाद पाकिस्तान ने जम्मू और कश्मीर संभाग में एलओसी और बार्डर पर सीजफायर उल्लंघन कर लगातार घुसपैठ कराने की कोशिश की है।
तंकियों के लांचिंग पैड ध्वस्त किए जाने के बाद अब घाटी में छिपे आतंकियों के बूते किसी बड़े हमले की कोशिश हो सकती है।