जो शरारती तत्व सेना के हेलीकाप्टरों पर पत्थर बरसा रहे, सेना उन्हें भी बचा रही है। आपरेशन राहत द्वितीय में बिना भेदभाव के काम चल रहा है। जैसे ही सूचना मिलती है, वैसे ही बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने के लिए हम लोग गंभीरता से काम कर रहे हैं।
वायु सेना ने इन आरोपों को भी खारिज किया है कि सेना सभी बाढ़ पीड़ितों तक नहीं पहुंच पा रही है।
एयर वाइस मार्शल उपकारजीत सिंह ने रविवार को कहा कि वायु सेना ने अपने सबसे बड़े एयरक्राफ्ट सी17एस, सी130जेएस, आईएल76एस और एएन32एस आपरेशन राहत द्वितीय के लिए लगाए हैं जो दिन-रात लोगों को बचाने और रिलीफ पहुंचाने का काम कर रहे हैं।
'हम समझते हैं कि लोगों में गुस्सा है'
एयर वाइस मार्शल उपकारजीत सिंह ने कहा कि लोगों तक पहुंचने में दिक्कत हो रही है। लोगों को बचाने और रिलीफ पहुंचाने के काम में जुटे वायु सेना के हेलीकाप्टरों पर लोगों द्वारा पत्थर मारे जा रहे हैं।
कुछ पत्थरबाजों द्वारा एक हेलीकाप्टर को हिट भी किया गया। सेना ने अब रणनीति बदलते हुए जमीन से सुरक्षा फासला बनाकर काम करने की योजना बनाई है। उन्होंने कहा, हम समझते हैं कि लोगों में गुस्सा है।
परिवार में बच्चे भी नाराज हो जाते हैं लेकिन हमें उनकी मदद करनी है। सिंह ने कहा कि बाढ़ से जम्मू और कश्मीर में काफी नुकसान हुआ है। वायु सेना ने बड़े पैमाने पर राहत कार्य शुरू किया है।
'कश्मीर समुद्र की तरह दिख रहा था'
कश्मीर घाटी में हवाई दौरे के दौरान एयर वाइस मार्शल उपकारजीत सिंह ने जो दृश्य देखा, उसको बयां करते हुए सिंह ने कहा, सात सितंबर को जब हमने घाटी में राहत अभियान शुरू किया था तो घाटी का एक बड़ा हिस्सा पानी में डूब गया था।
कश्मीर समुद्र की तरह दिख रहा था। डल, झेलम और रिहायशी क्षेत्रों में कोई अंतर नहीं नजर आ रहा था। हर तरफ सिर्फ पानी था। उन्होंने कहा कि दूरसंचार सेवाएं ठप थीं। कहीं से कोई जानकारी नहीं मिल रही थी।
ऐसे में हवाई सर्वे कर जो इनपुट मिले, उसी के आधार पर राहत कार्य चलाया गया। सिंह ने कहा कि पानी में डूब चुके घरों से लोगों को निकाला गया। कमांडो ने लोगों को छतों, बालकोनियों और खिड़कियों से उठाया है। इस तरह से कम से कम भी हजार लोगों को बचाया गया।