नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही निजी स्कूलों की मनमानी शुरू हो गई है। जम्मू शहर के कई निजी स्कूल अभिभावकों को बच्चों के लिए पुस्तकें एक ही दुकान से खरीदने के लिए बाध्य कर रहे हैं। पिछले साल की वर्दी में भी हल्का सा बदलाव कर नई वर्दी लेना अनिवार्य कर दिया है। कई स्कूलों ने तो अपनी वर्दी का सिर्फ मोनोग्राम ही बदला है। पहली कक्षा हो या पांचवीं, छठी, सातवीं बच्चों की पुस्तकें पांच से 15 हजार रुपये तक मिल रही हैं। जम्मू संस्कृति स्कूल, सेंट जेवियर कॉन्वेंट स्कूल बरनाईं, रिच हार्वेस्ट स्कूल जैसे कई स्कूल संचालक एक ही दुकान से पुस्तकें खरीदने के लिए कह रहे हैं।
स्कूल शिक्षा विभाग ने कक्षा छठी से 12वीं तक जेके बोर्ड की ओर से तय पुस्तकें पढ़ाने के लिए कहा है। बावजूद इसके निजी स्कूलों की मनमानी ऐसी है की बोर्ड की पुस्तकों के साथ-साथ अपनी सात से आठ पुस्तकें खरीदने के लिए अभिभावकों को कहा जा रहा है। इसमें एक पुस्तक की कीमत 200 रुपये से अधिक है। कच्ची छावनी स्थित साहित्य संगम और नई बस्ती में स्टेशनरी दुकान से शहर के अधिकांश स्कूलों की पुस्तकें मिल रही हैं।
ऐसे में यहां पर लोगों की भीड़ जुट रही है। रिच हार्वेस्ट स्कूल, सेंट जेवियर कॉन्वेंट स्कूल बरनाईं जैसे स्कूलों ने अभिभावकों को इसी दुकान से पुस्तकें लेने को कहा है। अभिभावकों का कहना है कि एक कक्षा की पुस्तकें पांच से छह हजार रुपये तक की हैं। निजी स्कूल स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं और विभाग शिकायत आने का इंतजार कर रहा है। हर साल निजी स्कूलों की मनमानी के आगे अभिभावक और स्कूल शिक्षा विभाग बेबस हो जाता है।
कमेटी की मंजूरी के बिना फीस भी बढ़ाई
नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही अधिकांश निजी स्कूल ने फीस फिक्सेशन कमेटी की मंजूरी के बिना ही फीस में वृद्धि कर दी है। निजी स्कूलों के आगे अभिभावक बेबस हैं, लेकिन सब कुछ देखने के बाद भी स्कूल शिक्षा विभाग इन स्कूलों पर कार्रवाई नहीं कर रहा। नाम न छापने की शर्त पर एक अभिभावक ने कहा कि शिक्षा निकेतन स्कूल ने एक दुकान से वर्दी खरीदने और पुस्तकें लेने को कहा है। हमारे घर से यह दुकान 20 किलोमीटर दूर है। कई घंटे तक लाइन में लगने के बाद पुस्तकें ले पाते हैं। एक पुस्तक की कीमत 200 से 400 रुपये तक है। यूकेजी के एक बच्चे पर किताबों, वर्दी का पूरा खर्च 15 हजार रुपये तक आ जाता है।
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शहर के प्रमुख स्कूल संचालकों का तर्क
रिच हार्वेस्ट स्कूल के प्रबंध निदेशक गंभीर सिंह चाढ़क का कहना है कि हमने किसी भी अभिभावक को किसी एक दुकान से पुस्तक खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया है। अभिभावक को अगर किसी भी दुकान से पुस्तक मिल सकती है तो वे पुस्तक खरीद सकते हैं। सेंट जेवियर कॉन्वेंट स्कूल बरनाईं के प्रिंसिपल मृदु पादा का कहना है कि अभिभावक कहीं से भी पुस्तकें ले सकते हैं, पुरानी पुस्तकों का भी इस्तेमाल करते सकते हैं। स्कूल द्वारा तय की पुस्तकें अगर उन्हें किसी दुकान पर मिल जाती हैं तो वहां से ले सकते हैं। बोर्ड ने पुस्तकें तय की हैं, लेकिन इसके अतिरिक्त जो पुस्तकें स्कूल पढ़ा रहा है वे बच्चे के समग्र विकास के लिए जरूरी हैं। उधर, जम्मू संस्कृति स्कूल प्रबंधकों से इस संबंध में बात करनी चाही तो उन्होंने फोन का जवाब नहीं दिया। जब भी वह इस संबंध में अपना पक्ष देना चाहेंगे तो उसे प्रकाशित किया जाएगा।
सभी जोनल शिक्षा अधिकारियों को आदेश दिया है कि अभिभावकों से जुड़ी शिकायत पर सख्ती से कार्रवाई करें। अभिभावकों से शिकायत मिलने पर कार्रवाई होगी। हम भी अपने स्तर पर औचक निरीक्षण कर जांच करेंगे।
-सूरज सिंह राठौड़, मुख्य शिक्षा अधिकारी जम्मू।