वार्षिक नाट्य उत्सव के 13वें दिन अभिनव थियेटर में हिंदी नाटक अंतनवर्णन का मंचन किया गया। नाटक की कहानी एक वेश्या और व्यक्ति के बीच के संवाद पर आधारिक है। इसमें मनोविज्ञान के आठ अध्याय हैं, जो विभिन्न संदर्भों में मानव के यौन उत्पीड़न से संबंधित हैं। नाटक की कहानी में दिखाया गया कि एक 13 साल की किशोरी यौन उत्पीड़न का शिकार हो जाती है। उसका शिक्षक उसे अपनी हवस का शिकार बना देता है।
वह बचपन में अपने साथ हुई इस घटना को भूल नहीं पाती है और अपने अपमान का बदलना लेना चाहती है। यह छोटी बच्ची अब खूबसूरत युवती माया लेविंस्की है, जो अपने अपमान का बदलना लेना चाहती है। शिक्षक शेखर अग्निहोत्री बदमिजाज व्यक्ति है, अक्सर वेश्या के पास जाता है। माया एक वेश्या बनकर उससे सात सितारा होटल में मिलती है।
दोनों के बीच संबंध बनते हैं। माया ने बदला लेने के लिए खुद को एचआईवी से पीड़ित किया था और दोनों के बीच संबंध बनने पर शिक्षक भी उससे पीड़ित हो जाता है। माया इसके बाद होटल में अपने आप को जला लेती है। माया कि आत्मा शिक्षक को उसे एचआईवी संक्रमित होने की बात बताती है। नाटक में आदित्य भानू, शीतल शान ने मुख्य भूमिका निभाई।
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